रामगढ़, झारखंड : दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण सम्मान दिए जाने के बाद झारखंड की राजनीति और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस सम्मान का स्वागत करते हुए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है, लेकिन पार्टी के भीतर और राज्य के राजनीतिक-सामाजिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि दिशोम गुरु के लिए भारत रत्न की मांग जारी रहेगी।
झारखंड के लोगों के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि क्या पद्मभूषण जैसा सम्मान दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान के अनुरूप है। जानकारों का कहना है कि पद्म पुरस्कारों के वितरण में इस बार भी राजनीतिक संतुलन और केंद्र सरकार के हितों को प्राथमिकता दी गई है।
गौरतलब है कि पद्म पुरस्कार चार श्रेणियों में दिए जाते हैं—भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री। झारखंड विधानसभा द्वारा दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था। इसके बावजूद उन्हें तीसरे क्रम का पद्म पुरस्कार, पद्मभूषण, प्रदान किया गया। इस वर्ष भारत रत्न किसी को नहीं दिया गया, जबकि पद्म विभूषण पांच लोगों को प्रदान किया गया।
इन पांच पद्म विभूषण पुरस्कारों में अभिनेता धर्मेंद्र देओल को मरणोपरांत सम्मानित किया गया है। उनके कला क्षेत्र में योगदान पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फिल्मी कलाकार अपनी सेवाओं के बदले पहले ही भारी पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं। वहीं, केरल में हाल ही में तिरुवनंतपुरम में भाजपा का मेयर चुने जाने के बाद पार्टी को वहां राजनीतिक संभावनाएं नजर आ रही हैं, जिसके कारण इस बार पांच में से तीन पद्म विभूषण केरल से जुड़े व्यक्तियों को दिए गए।
झारखंड से इस वर्ष किसी को भी पद्म श्री सम्मान नहीं मिलना भी राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि बिहार से तीन लोगों को पद्म श्री दिया गया है। ऐसे में यह आरोप और मजबूत हो रहा है कि पद्म पुरस्कार केंद्र सरकार के राजनीतिक हित साधने का माध्यम बनते जा रहे हैं।
राज्य में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक समीकरण बेहतर होते, तो संभवतः दिशोम गुरु शिबू सोरेन को और उच्च पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाता। कई लोग इसे हेमंत सोरेन सरकार के साथ केंद्र के रिश्तों से भी जोड़कर देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, पद्मभूषण सम्मान के बाद भी दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की मांग झारखंड में और तेज होती दिख रही है, और यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है।
गुरुजी भारत रत्न थे और रहेंगे : प्रदीप तिवारी
प्रदीप तिवारी
इस संबंध में रांची के युवा समाजसेवी प्रदीप तिवारी ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन किसी पुरस्कार के मोहताज नहीं है। वे हमारे व तमाम झारखंड वासियों के दिलोें में बसे हैं। उन्हें हर हाल में भारत रत्न मिलना चाहिए था। उनको भारत रत्न दिये जाने के लएि हम संघर्ष व मांग करते रहेंगें।