रामगढ़ (झारखंड) : पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने उपायुक्त को लिखा पत्र, होलिका दहन की भूमि को लेकर जांच रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल

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रामगढ़ (झारखंड) :  झारखंड विधानसभा के पूर्व सदस्य शंकर चौधरी ने रामगढ़ (झारखंड) जिले के उपायुक्त को पत्र लिखकर रामगढ़ के लोहार टोला स्थित होलिका दहन की भूमि से जुड़े मामले में अंचल अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताई है। इसके साथ ही उन्होंने अपने आवासीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक की।

शंकर चौधरी ने बताया कि अंचल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट बिना समुचित अध्ययन और जांच के तैयार की गई प्रतीत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में दर्शाए गए भूमि विवरण और अभिलेखों में कई स्तर पर गंभीर विसंगतियां हैं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जिस भूमि को खाता संख्या 130, प्लॉट संख्या 411, रकबा एक एकड़ 94 डिसमिल बताया गया है, वही भूमि ऑनलाइन पंजी-2 में 33 रैयतों के नाम दर्ज है। सभी रैयतों की जमाबंदी जोड़ने पर कुल रकबा तीन एकड़ 60 डिसमिल बताया जा रहा है, जबकि कुछ रैयतों के नाम पर शून्य रकबा दर्शाया गया है। ऐसे में दस्तावेजों में चार एकड़ से अधिक भूमि कैसे दर्शायी जा रही है, यह गंभीर प्रश्न है।

पूर्व विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि जिस भूमि पर वर्षों से होलिका दहन का आयोजन होता आ रहा है, वह वास्तव में सरकारी भूमि है और लगभग 70 वर्षों से सभी समाज के लोग यहां होलिका दहन का कार्यक्रम करते आ रहे हैं।

पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने शरणार्थियों के नाम पर भूमि आवंटन, बाद में उस भूमि की खरीद-बिक्री तथा कुछ व्यक्तियों के नाम पर दाखिल-खारिज किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा किसी को बसाया गया था, तो क्या उस भूमि की बिक्री की अनुमति दी गई थी, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

शंकर चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट में कई नामों को बिना ठोस आधार के शामिल किया गया है और वास्तविक मूल रैयत से संबंधित तथ्यों की अनदेखी की गई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीर भूमि अनियमितता से जुड़ा मामला बताया।

पूर्व विधायक ने उपायुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों की जमाबंदी रद्द की जाए, गलत दस्तावेजों के आधार पर किए गए कार्यों पर कानूनी कार्रवाई हो तथा होलिका दहन की परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए उक्त भूमि पर प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।