अडाणी के औद्योगिक साम्राज्यवाद की आंच झारखंड पहुंची, झारखंड के कई रिफ्रेक्ट्रिज प्लांट जा सकते हैं अडाणी के कब्जे में

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नीरज अमिताभ 

रामगढ़, झारखंड :  भारत में विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि केंद्र सरकार के सहयोग से अडाणी समूह पूरे देश में अपना औद्योगिक साम्राज्य फैला रहा है और सरकारी व सार्वजनिक उपक्रमों को अपने कब्जे में ले रहा है। हाल के दिनों में अडाणी के औद्योगिक साम्राज्यवाद की आंच झारखंड में भी पहुंचती दिख रही है। इस बार अडाणी के औद्योगिक साम्राज्यवाद व निजीकरण का पंजा सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

झारखंड में सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट (एसआरयू) के तीन प्लांट अवस्थित हैं। रामगढ़ जिला के रांची रोड मरार में दो प्लांट—सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट इफिको और रांची रोड रिफ्रेक्ट्रिज प्लांट—स्थित हैं। वहीं सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट के तहत एक और प्लांट झारखंड के बोकारो जिला के भंडारीदह में स्थित है, जबकि सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट का चौथा प्लांट मध्य प्रदेश के भिलाई में स्थित है।

बताया जा रहा है कि इन प्लांटों को अडाणी को देने का पूरा प्लान तैयार हो चुका है और प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। लेकिन हंगामा न हो और प्लांट अडाणी को मिल जाए, इस वजह से इस बार सीधे तरीके से नहीं बल्कि घुमा-फिराकर प्रक्रिया अपनाने की तैयारी की गई है। कहा जा रहा है कि आम लोग इस पूरे गोरखधंधे को समझ भी नहीं पाएंगे और सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट अडाणी के कब्जे में चला जाएगा।

वर्तमान में स्टील ऑथिरिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत आने वाले सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट के तहत चार रिफ्रेक्ट्रिज प्लांट आते हैं। इन प्लांटों का संचालन एसआरयू के माध्यम से किया जाता है। एक सोची-समझी साजिश के तहत सेल में ही बनाई गई सेल रिफ्रेक्ट्रिज कंपनी लिमिटेड (एसआरसीएल) में अब एसआरयू को डिमर्ज (मिला देने) की योजना बनाई गई है। जबकि वर्तमान में एसआरयू रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट ठीक-ठाक तरीके से चल रहा है।

कागजों में इसे कंपनी की सामान्य प्रक्रिया बताया जा सकता है, लेकिन इसके पीछे का खेल कुछ और बताया जा रहा है। नई बनाई गई कंपनी एसआरसीएल की सहयोगी व हिस्सेदार एक जर्मन कंपनी है। यहां तक भी कहा जा सकता है कि ऐसा होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन चर्चा यह है कि उक्त जर्मन कंपनी में अडाणी समूह की हिस्सेदारी है।

इसी वजह से कहा जा रहा है कि अडाणी का नाम सीधे तौर पर सामने न आए, इसलिए पूरी प्रक्रिया को घुमा-फिराकर अपनाया जा रहा है। अंततः रिफ्रेक्ट्रिज प्लांट अडाणी समूह के कब्जे में ही चला जाएगा।

पूरे मामले को काफी गोपनीय रखा जा रहा है। प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अधिकारी इस पर कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं। अधिकारी स्तर पर इस पूरी योजना को काफी गोपनीय रखा गया है।

यह बात भी सामने आ रही है कि रामगढ़ के रांची रोड स्थिति सेल रिफ्रेक्ट्रीज यूनिट  इफिको प्लांट की जमीन पर स्थित फुटबॉल मैदान में नई बनी कंपनी एसआरसीएल के अंतर्गत एक प्लांट की स्थापना की जाएगी। इसका पूरा प्लान भी तैयार बताया जा रहा है।

हालांकि इस योजना का विरोध भी प्रारंभ हो गया है। शुक्रवार को इस योजना के खिलाफ रांची रोड स्थित सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट इफिको में तथा शनिवार को सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट रांची रोड में कर्मचारियों की बैठक भी हुई है।

लेकिन वर्तमान समय के हालात और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को देखते हुए कहा जा रहा है कि यह विरोध नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह सकता है और अंततः सेल रिफ्रेक्ट्रिज यूनिट का निजीकरण हो सकता है।