अघोराचार्य बोरिया बाबा का निधन, नर्मदा किनारे आश्रम में ली अंतिम सांस, रजरप्पा में भी की थी आश्रम की स्थापना

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रजरप्पा (रामगढ़), झारखंड : प्रसिद्ध संत महामंडलेश्वर अघोराचार्य हरे राम ब्रह्मचारी, जिन्हें लोग बोरिया बाबा के नाम से जानते थे, का 18 मार्च 2026 (अमावस्या) को 127 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने नर्मदा नदी के तट पर स्थित अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। उनके देहांत की खबर से देशभर में फैले श्रद्धालुओं और संत समुदाय में शोक का माहौल है। आश्रम परिसर में ही उनकी समाधि बनाने की तैयारी की जा रही है।

बोरिया बाबा की आध्यात्मिक यात्रा रजरप्पा से शुरू हुई थी। यहां मां छिन्नमस्तिका मंदिर के पास दामोदर और भैरवी नदियों के संगम क्षेत्र में उनका प्रमुख आश्रम स्थित है। इसी स्थान पर उन्होंने वर्षों तक साधना और तपस्या कर अपनी अलग पहचान बनाई।

उनका प्रभाव कई राज्यों तक फैला हुआ था। पश्चिम बंगाल के बीरभूम और बिहार के कहलगांव (गंगा किनारे) में भी उनके आश्रम मौजूद हैं। इसके अलावा हिमालय क्षेत्र में भी उन्होंने लंबे समय तक ध्यान और साधना की थी।

रजरप्पा स्थित उनके आश्रम में समय-समय पर कई नेता, जनप्रतिनिधि और अन्य प्रसिद्ध लोग उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचते रहे। इससे उनका प्रभाव क्षेत्र और भी व्यापक होता गया।

बोरिया बाबा पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर भी सक्रिय रहे। उन्होंने कहलगांव में गंगा तट पर “पर्यावरण कुंभ” आयोजित करने की योजना बनाई थी और इस दिशा में प्रयास भी किए थे।

उनके निधन से संत समाज और अनुयायियों में गहरा दुख है। उन्हें एक ऐसे संत के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने अपना जीवन आध्यात्म, प्रकृति संरक्षण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।