राष्ट्रपति सचिवालय ने झारखंड के छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति राशि पर केंद्र सरकार से मांगी कार्रवाई

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रामगढ़ (झारखंड) : झारखंड के अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों की लंबित केंद्रीय छात्रवृत्ति राशि शीघ्र जारी कराने की मांग को लेकर भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लिया है। राष्ट्रपति सचिवालय, नई दिल्ली ने इस मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव को अग्रेषित कर दिया है।

यह याचिका रामगढ़ सिविल कोर्ट के सरकारी अधिवक्ता संजीव कुमार अम्बष्ठ ने 2 मई 2026 को भारत की राष्ट्रपति को भेजी थी। याचिका में झारखंड के हजारों विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत केंद्रीय अंश की राशि समय पर जारी नहीं होने से उत्पन्न गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया था।

लगभग 900 करोड़ रुपये लंबित होने का दावा

याचिका में उल्लेख किया गया है कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत केंद्र सरकार का लगभग 900 करोड़ रुपये का अंश लंबित है। इसके कारण राज्य के हजारों छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक शुल्क जमा करने में कठिनाई हो रही है। कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के सामने पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ रही है।

शिक्षा और सामाजिक न्याय पर असर

संजीव कुमार अम्बष्ठ ने अपने पत्र में कहा है कि SC, ST और OBC विद्यार्थियों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं का उद्देश्य शैक्षणिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। लेकिन केंद्रीय राशि जारी होने में देरी तथा केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी के कारण इन योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

राष्ट्रपति से की गई प्रमुख मांगें

याचिका में राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार को निम्न बिंदुओं पर आवश्यक निर्देश और अनुशंसा दी जाए—

  • लंबित केंद्रीय छात्रवृत्ति राशि अविलंब जारी की जाए।

  • केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

  • SC, ST और OBC विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

  • आर्थिक अभाव के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो।

राष्ट्रपति सचिवालय ने दिया कार्रवाई का निर्देश

राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव अशोक कुमार द्वारा 8 मई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि याचिका “स्वतः स्पष्ट” है। संबंधित विभाग से अनुरोध किया गया है कि इस पर की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।

छात्रों को मिल सकती है बड़ी राहत

याचिकाकर्ता संजीव कुमार अम्बष्ठ ने उम्मीद जताई है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई होने पर झारखंड के हजारों जरूरतमंद विद्यार्थियों को राहत मिलेगी और उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सकेगी।