रामगढ़ (झारखंड) : रामगढ़ जिला के सरकारी अधिवक्ता संजीव कुमार अंबष्ठ द्वारा सरना धर्म को जनगणना में अलग धार्मिक पहचान देने की मांग को लेकर भारत की राष्ट्रपति महोदया को भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने कार्रवाई करते हुए मामले को उचित विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को अग्रेषित कर दिया है।
राष्ट्रपति सचिवालय, राष्ट्रपति भवन से अवर सचिव अशोक कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति महोदया को संबोधित यह याचिका “स्वतः स्पष्ट” है और इसे संबंधित विभाग को उचित ध्यानाकर्षण हेतु भेजा गया है।
पत्र के अनुसार, गृह मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी गोविंद मोहन को भी विषय पर आवश्यक कार्रवाई एवं विचार के लिए प्रेषित किया गया है। साथ ही याचिकाकर्ता से भविष्य में इस मामले की प्रगति की जानकारी के लिए संबंधित विभाग से सीधे संपर्क करने का अनुरोध किया गया है।
सरना धर्म की अलग पहचान की मांग
संजीव कुमार अंबष्ठ ने अपनी याचिका में कहा है कि सरना धर्म भारत के आदिवासी समाज की प्राचीन और विशिष्ट धार्मिक परंपरा है। यह प्रकृति पूजा, जल-जंगल-जमीन, सरना स्थल, पवित्र वृक्षों और पारंपरिक आदिवासी संस्कृति पर आधारित है।
झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में लाखों लोग सरना धर्म का पालन करते हैं, लेकिन अब तक जनगणना में उन्हें अलग धार्मिक पहचान नहीं मिली है। वर्तमान व्यवस्था में सरना अनुयायियों को अन्य धर्मों की श्रेणी में दर्ज होना पड़ता है, जिससे उनकी वास्तविक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाती।
झारखंड विधानसभा ने 2020 में पारित किया था प्रस्ताव
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2020 में झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड लागू करने के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। झारखंड सरकार तथा मुख्यमंत्री द्वारा भी समय-समय पर इस मांग का समर्थन किया जाता रहा है।
अलग कोड मिलने से होंगे कई लाभ
याचिका के अनुसार, सरना धर्म को अलग धार्मिक कोड मिलने से आदिवासी समाज की वास्तविक जनसंख्या का सही आंकड़ा सामने आएगा, उनकी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण होगा तथा सरकार को विकास और कल्याण की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से बनाने में सहायता मिलेगी।
यह कदम भारतीय संविधान में निहित समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता की भावना को और मजबूत करेगा।
केंद्र सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपील
श्री संजीव कुमार अंबष्ठ ने राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा मामले को आगे बढ़ाए जाने पर आभार व्यक्त किया है। उन्होंने केंद्र सरकार और संसद से इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक पहचान का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, अस्तित्व और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।