रामगढ़ (झारखंड) : झारखंड में डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में लंबे समय से खाली पड़े पीठासीन पदाधिकारी ( प्रेसिडिंग ऑफिसर ) के पद पर शीघ्र नियुक्ति की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में रामगढ़ के सरकारी अधिवक्ता संजीव कुमार अम्बष्ठा द्वारा भेजी गई याचिका पर वित्त मंत्री कार्यालय ने मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को अग्रेषित कर दिया है।
संजीव कुमार अम्बष्ठा ने भारत सरकार की वित्त मंत्री को भेजी गई याचिका में कहा था कि झारखंड डीआरटी में पीठासीन पदाधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त रहने के कारण हजारों मामलों का निष्पादन प्रभावित हो रहा है। बैंक, वित्तीय संस्थान, व्यवसायी और आम नागरिक न्याय के लिए परेशान हैं।
नई दिल्ली स्थित वित्त मंत्री कार्यालय ने 12 मई 2026 को ईमेल के माध्यम से सूचित किया कि इस मामले को आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विभाग को भेज दिया गया है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया और विभिन्न उच्च न्यायालय समय-समय पर ट्रिब्यूनलों में रिक्त पदों पर चिंता जता चुके हैं तथा शीघ्र नियुक्ति के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद झारखंड डीआरटी में स्थिति यथावत बनी हुई है।
संजीव कुमार अम्बष्ठा ने सरकार से मांग की है कि अपॉइंटमेंट्स समिति ऑफ़ द कैबिनेट (एसीसी) के माध्यम से अविलंब पीठासीन पदाधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके और लोगों को समय पर न्याय मिल सके।
उन्होंने कहा कि डीआरटी में अधिकारी नहीं होने से लोगों को मजबूर होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।