रामगढ़ की राजनीति में फिर हलचल ! मनोज यादव की पोस्ट से तेज हुई कुमार महेश सिंह के भाजपा में वापसी की चर्चा

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विधायक मनोज यादव द्वारा सोशल मीडिया पर डाला गया पोस्ट

रामगढ़ कैंट (झारखंड) : रामगढ़ जिले की राजनीति में एक बार फिर नई सियासी हलचल की आहट सुनाई देने लगी है। बरही से भाजपा विधायक मनोज कुमार यादव की सोशल मीडिया पोस्ट ने रामगढ़ और हजारीबाग के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। पोस्ट में साझा की गई तस्वीरों के बाद कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं मजदूर नेता कुमार महेश सिंह के भाजपा में संभावित वापसी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

वायरल हो रही तस्वीरों में भाजपा विधायक मनोज कुमार यादव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का बुके देकर स्वागत करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं उनके साथ मौजूद कुमार महेश सिंह भी हाथ जोड़कर नितिन नवीन का अभिवादन करते नजर आ रहे हैं। इसी तस्वीर को आधार बनाकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि बाद में पोस्ट से कुमार महेश सिंह वाली तसवीरों को हटा दिया गया है। लेकिन तब तक सोशल मीडिया का यह पोस्ट पूरे क्षेत्र में वायरल हो चुका था।

कुमार महेश सिंह का राजनीतिक सफर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने पहले कांग्रेस के टिकट पर मांडू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा के प्रत्याशी के रूप में दोबारा चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में मांडू सीट गठबंधन के तहत आजसू पार्टी के खाते में चली गई, जिससे उनका भाजपा टिकट कट गया। इससे नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में उन्होंने पुनः कांग्रेस का दामन थाम लिया और वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस में उन्हें पहले जैसी सक्रिय भूमिका और महत्व नहीं मिल पाया।

बताया जाता है कि कुमार महेश सिंह और बरही विधायक मनोज कुमार यादव के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत और राजनीतिक स्तर पर अच्छे संबंध रहे हैं। ऐसे में मनोज यादव की इस पोस्ट ने संभावित राजनीतिक बदलाव की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

हालांकि, अब तक न तो कुमार महेश सिंह और न ही भाजपा की ओर से उनके दल बदलने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा की गई है। फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर चल रही राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों तक ही सीमित है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा होती है तो रामगढ़ और आसपास की राजनीति में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।