एनएचएआई और केंद्र से मांगा जवाब, पूछा- हाईवे पर अवैध ढाबों और अतिक्रमण को रोकने की कानूनी जिम्मेदारी किसकी है ?
नई दिल्ली :देश में एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि हाईवे किनारे बिना अनुमति संचालित ढाबे, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान कई दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बन रहे हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोर्ट ने पूरे देश में लागू होने वाली व्यापक गाइडलाइन तैयार करने की संभावना जताई है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अवैध ढाबों के निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग या प्राधिकरण की है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि मौजूदा कानूनों के तहत ऐसे अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि अवैध निर्माण हटाने के लिए नियम मौजूद हैं, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर इसकी जिम्मेदारी अक्सर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पर आ जाती है। चूंकि ये एजेंसियां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सीधे नियंत्रण में नहीं होतीं, इसलिए कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
पूरे देश की समस्या, केवल एक राज्य का मामला नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक राज्य तक सीमित समस्या नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के किनारे अनियंत्रित अतिक्रमण और अवैध ढाबों का निर्माण हो रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है। अदालत ने कहा कि यदि कानूनी व्यवस्था में कोई कमी है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।
हर हाईवे पर सर्विस रोड नहीं, इसलिए बढ़ता है जोखिम
पीठ ने टिप्पणी की कि सभी एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सर्विस रोड उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में मुख्य सड़क के किनारे बने अवैध ढाबों और होटलों पर वाहन अचानक रुकते या मुड़ते हैं, जिससे गंभीर सड़क दुर्घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती है। अदालत ने इस स्थिति को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।
फलोदी हादसे के बाद लिया गया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के फलोदी जिले में भारतमाला परियोजना के हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे का भी उल्लेख किया। इस दुर्घटना में सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से टकराने के कारण एक टेम्पो ट्रैवलर में सवार 15 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस घटना के बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सड़क सुरक्षा से जुड़े व्यापक पहलुओं पर सुनवाई शुरू की।
अदालत ने न्याय मित्र भी किया नियुक्त
मामले की निष्पक्ष समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एन.एस. नदकर्णी को न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया है। उन्होंने अदालत के समक्ष हाईवे पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण से संबंधित तस्वीरें एवं अन्य सामग्री भी प्रस्तुत की है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अवैध अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण, वाहनों की गति की निगरानी, सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था और हाईवे प्रबंधन को मजबूत किया जाए तो बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।