‘शिक्षा में माफियागिरी बंद हो, भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बने’
रामगढ़ (झारखंड): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच रामगढ़ विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी धनंजय कुमार पुटूस ने सरकार से फर्जी अथवा अनियमित प्रमाणपत्र जारी करने वाले विश्वविद्यालय का नाम सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में माफियागिरी पर रोक लगनी चाहिए और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष होनी चाहिए।
धनंजय कुमार पुटूस ने कहा कि हाल ही में चयनित 33 महिला पर्यवेक्षकों की डिग्रियों को लेकर उठे सवालों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यदि मामले की जांच चल रही है तो संबंधित निजी विश्वविद्यालय का नाम सार्वजनिक करने में सरकार को किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी ने फर्जी या अनियमित प्रमाणपत्र का उपयोग किया है तो केवल अभ्यर्थियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने वाले विश्वविद्यालयों, उनके प्रबंधन तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
पुटूस ने कहा कि झारखंड का युवा पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था चाहता है। किसी भी दोषी को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। सरकार और संबंधित एजेंसियों को पूरे मामले की सच्चाई पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखनी चाहिए।
सरकार से कीं ये प्रमुख मांगें
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संबंधित निजी विश्वविद्यालय का नाम तत्काल सार्वजनिक किया जाए।
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दोषी विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
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पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी अथवा न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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भर्ती प्रक्रिया और डिग्री से जुड़े सभी आरोपों की व्यापक जांच हो।
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निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य की हर हाल में रक्षा सुनिश्चित की जाए।