सोशल मीडिया की लत रोकने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को भेजा गया पत्र

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रामगढ कैंट (झारखण्ड) : शांतिधारा फ़ाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुरेश पी. अग्रवाल ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर देश में बच्चों और “जेन अल्फा” पीढ़ी के बीच बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार से व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने का आग्रह किया है।

पत्र में सुरेश पी. अग्रवाल ने कहा है कि भारत में बड़ी संख्या में बच्चे कम उम्र में ही सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के आदी होते जा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न अध्ययनों और उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 15 वर्ष तक के 75 प्रतिशत बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं, जबकि करीब 50 प्रतिशत बच्चे प्रतिदिन तीन घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। वहीं लगभग 60 प्रतिशत बच्चे व्हाट्सएप, यूट्यूब और फेसबुक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण नाबालिगों में अनिद्रा, तनाव, चिंता, अवसाद तथा एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग को “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” और “डिजिटल एडिक्शन” के रूप में चिन्हित किया गया है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देशों ने 15-16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू किए हैं।

इन तथ्यों का हवाला देते हुए सुरेश पी. अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नेतृत्व में बच्चों और “जेन अल्फा” को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस दिशा में उठाया गया कदम देश के बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।