रामगढ़ कैंट, झारखंड : 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रामगढ़ जिला पेंशनर कल्याण समाज की ओर से जिला कार्यालय, पुराने अनुमंडल परिसर में झंडारोहण समारोह आयोजित किया गया। जिला अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और उपस्थित पेंशनरों एवं नागरिकों ने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का संकल्प लिया।
झंडारोहण के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1757 से लगभग दो सौ वर्षों तक चले लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को देश को स्वतंत्रता मिली। उन्होंने कहा कि भारत का अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण बना और महात्मा गांधी की अहिंसा तथा सत्याग्रह आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उन महान पुरखों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। यह दिन हमें उनके बताए रास्ते पर चलने और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
देश की एकता और अखंडता की रक्षा का आह्वान
जिला अध्यक्ष ने उपस्थित पेंशनरों और नागरिकों का आह्वान करते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर सभी को मिलकर संकल्प लेना चाहिए कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। उन्होंने आपसी भाईचारे, राष्ट्रीय एकता और जिम्मेदार नागरिकता को मजबूत करने पर जोर दिया।
समारोह को समाज के उपाध्यक्ष वृंदावन सिंह एवं गोविंद करमाली ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों को शुभकामनाएं दीं।
देशभक्ति गीतों से गूंजा परिसर
झंडारोहण कार्यक्रम के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें दूधेश्वर महतो, देवशरण महतो और दिलीप साहा ने खोरठा एवं हिंदी के देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। गीतों ने समारोह में देशभक्ति और उत्साह का माहौल बना दिया।
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह, उपाध्यक्ष वृंदावन सिंह, संरक्षक बलराम सिंह, पन्ना लाल राम, शिव शंकर मादी, संजय सिन्हा, दिलीप साहा, तुला राम महतो, प्रखंड अध्यक्ष देवशरण महतो, दूधेश्वर महतो, रामानंदन प्रसाद, मन नारायणन सिंह, सुधीर किशोर तिवारी, गोविंद करमाली, रामप्रसाद महतो, रेशम नाथ महतो, गजाधर साहू, मधुसूदन साहू, विपिन साहू, सत्येन्द्र प्रसाद, रविन्द्र प्रसाद, सरयू प्रसाद, बसंत कुमार, उमाशंकर साहू, जवाहर लाल महतो और कृष्णा प्रसाद समेत समाज के अन्य सदस्य एवं नागरिक मौजूद रहे।