रामगढ़ कांग्रेस कार्यालय उद्घाटन व झंडोत्तोलन से पहले भिड़े दो वरिष्ठ नेता, गाली-गलौज से हाथापाई तक पहुंचा मामला

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रामगढ़ कैंट, झारखंड :  स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रामगढ़ में कांग्रेस के नये जिला कार्यालय का उद्घाटन और झंडोत्तोलन कार्यक्रम तो संपन्न हो गया, लेकिन कार्यक्रम से पहले हुई कथित आपसी झड़प ने पूरे जिले में राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया। जिला समाहरणालय के समीप एनएच-23 किनारे नवनिर्मित कांग्रेस जिला कार्यालय का उद्घाटन किया गया और कार्यालय परिसर में जिला कांग्रेस अध्यक्ष सह विधायक ममता देवी ने झंडोत्तोलन किया। कार्यक्रम में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

हालांकि, कार्यक्रम की औपचारिकता से ज्यादा चर्चा उस विवाद की रही, जो कार्यालय उद्घाटन और झंडोत्तोलन से ठीक पहले दो वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच हुआ। बताया जा रहा है कि जिला के एक प्रदेश स्तरीय नेता और नवनियुक्त जिला स्तरीय पदाधिकारी के बीच किसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच सड़क किनारे ही तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज शुरू हो गयी। देखते ही देखते मामला कथित तौर पर हाथापाई तक पहुंच गया।

सड़क किनारे हुआ विवाद, जुट गयी लोगों की भीड़

घटना के दौरान सड़क किनारे खुलेआम हो रहे विवाद को देखने के लिए राहगीर भी रुक गये और देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुट गयी। प्रत्यक्षदर्शियों और मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अनुसार, विवाद के दौरान एक पक्ष के एक समर्थक भी वहां पहुंच गये और स्थिति तनावपूर्ण हो गयी। मामला मारपीट तक पहुंचने की स्थिति में आने के बाद मौके पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक ममता देवी समेत बड़ी संख्या में महिला नेता और महिला कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद थीं। कार्यक्रम से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने वहां मौजूद लोगों को असहज कर दिया।

कार्यकर्ताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की

घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर रही कि विवाद के दौरान मौजूद दो वरिष्ठ नेताओं ने कथित तौर पर मामले को तत्काल रोकने के लिए अपेक्षित कड़ा हस्तक्षेप नहीं किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि विवाद शुरू होते ही वरिष्ठ नेता स्पष्ट रूप से हस्तक्षेप करते और दोनों पक्षों को अलग कर देते तो स्थिति हाथापाई तक नहीं पहुंचती।

कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि घटना के बाद दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर विवाद समाप्त कराने की पहल होनी चाहिए थी। उनका मानना है कि राजनीतिक संगठन में व्यक्तिगत विवादों को सार्वजनिक होने से रोकना और आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए समाप्त करना वरिष्ठ नेतृत्व की जिम्मेदारी है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी उठ रही मांग

वहीं, घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में यह मांग भी उठ रही है कि यदि पार्टी के किसी पदाधिकारी या नेता ने सार्वजनिक रूप से अनुशासनहीनता की है तो संगठन को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रम में नेताओं के बीच इस तरह का विवाद संगठन की छवि पर प्रतिकूल असर डालता है।

स्वतंत्रता दिवस पर एक ओर कांग्रेस के नये जिला कार्यालय के उद्घाटन और झंडोत्तोलन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह था, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम से ठीक पहले सामने आया यह विवाद पूरे दिन रामगढ़ के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि, विवाद के वास्तविक कारण और इसमें शामिल पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।