औद्योगिक हादसों पर शंकर चौधरी का प्रशासन से सीधा सवाल : ‘मजदूरों की जान की कीमत पर नहीं चाहिए औद्योगिक विकास’

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रामगढ़ में औद्योगिक हादसों पर पूर्व विधायक शंकर चौधरी का हमला, पूछा- ‘मजदूर मरते रहें और प्रशासन सिर्फ जांच कराता रहे ?’

रामगढ़ में लगातार हो रहे हादसों को लेकर पूर्व विधायक ने खोला मोर्चा, उपायुक्त से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग ; कहा- 10 सितंबर को कार्यालय की सीढ़ियों पर अकेले देंगे धरना

रामगढ़ कैंट, झारखंड : रामगढ़ जिले के औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कारखानों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और श्रमिकों की मौत को लेकर झारखंड विधानसभा के पूर्व सदस्य शंकर चौधरी ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को अपने आवासीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने औद्योगिक हादसों को लेकर जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और उपायुक्त को पत्र सौंपकर कई बिंदुओं पर स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।

शंकर चौधरी ने कहा कि 6 अप्रैल 2026 से 21 अगस्त 2026 तक रामगढ़ जिले में हुई तीन बड़ी औद्योगिक घटनाओं में 9 श्रमिकों की मौत और 14 मजदूरों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है। उनके अनुसार, इनमें दो मजदूर जीवनभर के लिए अपंग हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही ये घटनाएं केवल औद्योगिक प्रबंधन की लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।

‘क्या हादसों के लिए सिर्फ प्रबंधन जिम्मेदार है ?’

पूर्व विधायक ने सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के लिए क्या केवल प्रबंधन को जिम्मेदार माना जाएगा? संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं के बाद जिला प्रशासन की ओर से तीन जांच समितियों के गठन की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट, कार्रवाई और जिम्मेदारी तय किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

श्रीराम पावर एंड स्टील को लेकर उठाए तीखे सवाल

शंकर चौधरी ने विशेष रूप से श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट, कुजू-मुरपा में 9 अगस्त 2026 को हुई दुर्घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से घटना की जांच कराई गई और प्लांट को बंद करने संबंधी आदेश जारी किए जाने की बात सामने आई थी।

उन्होंने सवाल किया कि यदि प्लांट को बंद करने का आदेश जारी किया गया था, तो इसके बावजूद वहां काम अथवा उत्पादन कैसे जारी है ? उन्होंने प्रशासन से प्लांट को बंद करने के लिए जारी नोटिस की प्रति सार्वजनिक करने तथा जांच में सामने आई खामियों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।

पूर्व विधायक ने कहा कि यदि प्रशासनिक आदेश के बावजूद किसी औद्योगिक इकाई में काम जारी है, तो यह जांच का विषय है कि क्या प्रबंधन प्रशासनिक आदेश की अवहेलना कर रहा है या अधिकारियों की जानकारी में ही प्लांट संचालित हो रहा है।

6 अप्रैल की घटना की जांच का क्या हुआ ?

शंकर चौधरी ने 6 अप्रैल 2026 को झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में हुई औद्योगिक घटना का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि उस घटना की जांच रिपोर्ट का क्या हुआ, जांच में किन लोगों को दोषी पाया गया और दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने जिले में हाल के दिनों में हुई तीन बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्राप्त हो चुकी है तो उसे सार्वजनिक किया जाए और यदि रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है तो संबंधित जांच समितियों से रिपोर्ट जल्द मंगाई जाए।

‘पिछले एक साल में कितनी बार हुआ कारखानों का निरीक्षण ?’

पूर्व विधायक ने प्रशासन और संबंधित विभागों की निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए नियमित रूप से बैठक होती है?

उन्होंने पिछले एक वर्ष में विभिन्न विभागों द्वारा किए गए औद्योगिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें किन-किन कारखानों का निरीक्षण किया गया, क्या कमियां मिलीं और गंभीर सुरक्षा खामियां मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी मांगी गई है।

‘मजदूरों की जान की कीमत पर विकास मंजूर नहीं’

पूर्व विधायक ने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन मजदूरों की जान की कीमत पर औद्योगिक विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता। श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और लापरवाही सामने आने पर प्रबंधन के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने उपायुक्त से सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक और बिंदुवार जानकारी सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

10 सितंबर को धरने की चेतावनी

शंकर चौधरी ने कहा कि यदि उन्हें मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और प्रशासन ने मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, तो वह 10 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपायुक्त कार्यालय की सीढ़ियों पर अकेले धरने पर बैठेंगे।

उन्होंने कहा कि यह कदम किसी राजनीतिक दबाव के लिए नहीं, बल्कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनकी जान की रक्षा के सवाल को लेकर उठाया जाएगा।

पत्रकार सम्मेलन के दौरान शंकर चौधरी ने कहा कि अब सवाल केवल हादसों के बाद मुआवजे का नहीं है, बल्कि यह तय करने का है कि आखिर बार-बार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदारी किसकी है और कार्रवाई कब होगी।