रामगढ़, झारखंड : रामगढ़ के जिला मैदान में आज ही के दिन, 12 सितंबर 2007 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने अपराह्न रामगढ़ जिले का उद्घाटन किया था। इस उद्घाटन के साथ ही रामगढ़ झारखंड का 24वां जिला बन गया था। जिला बनने के बाद वर्ष 2026 तक रामगढ़ ने कितनी तरक्की की और विकास के कितने पड़ाव पार किए, यह अब पीछे मुड़कर देखने का विषय है। हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण सवाल है कि जिला बनने के बाद रामगढ़ के लोगों के लिए विकास के साथ रोजगार के कितने अवसर पैदा हुए।
रामगढ़ को जिला बनाने में तत्कालीन विधायक और झारखंड सरकार के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। लंबे समय की मांग और प्रयासों के बाद रामगढ़ को जिला का दर्जा मिला। जिला बनने के बाद निःसंदेह विकास के कई कार्य हुए और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में भी काफी बदलाव देखने को मिला।
सड़कों से लेकर पुल-पुलियों तक हुआ विकास
रामगढ़ जिले से गुजरने वाले दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों में एक को फोरलेन किया गया, जबकि रामगढ़-बोकारो मार्ग का भी चौड़ीकरण हुआ। इसके साथ ही अब जिले से होकर गुजरने वाली दो भारतमाला सड़कों का निर्माण कार्य भी प्रारंभ है। इन परियोजनाओं से आने वाले समय में जिले की कनेक्टिविटी और आवागमन की सुविधाओं में और सुधार होने की उम्मीद है।
जिला बनने के बाद सरकारी भवनों का निर्माण हुआ। नगर परिषद की स्थापना हुई। स्कूलों के बेहतर भवन बने। विभिन्न क्षेत्रों में पुल-पुलियों का निर्माण हुआ। आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए। पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाओं के तहत काम किए गए। इन विकास कार्यों ने रामगढ़ की बुनियादी तस्वीर को काफी हद तक बदला है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बढ़े कदम
शिक्षा के क्षेत्र में भी रामगढ़ जिले में कई महत्वपूर्ण कार्य हुए। जिले में एक इंजीनियरिंग कॉलेज खुला। रामगढ़ महाविद्यालय में ही महिला डिग्री कॉलेज का निर्माण हुआ। इसके अलावा जिला में एक निजी विश्वविद्यालय भी खुला, जहां शैक्षणिक कार्य जारी हैं।
अब प्रयास यह भी जारी है कि रामगढ़ जिले में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो। यदि मेडिकल कॉलेज की स्थापना होती है तो इससे उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में भी जिले को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।
पर्यटन के क्षेत्र में भी रामगढ़ ने बनाई अलग पहचान
जिला बनने के बाद रामगढ़ ने पर्यटन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पतरातू डैम राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। यहां पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के अवसर भी बढ़े हैं। वहीं प्रसिद्ध तीर्थस्थल मां छिन्नमस्तिका धाम, रजरप्पा लंबे समय से लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और अब इसके सुंदरीकरण का कार्य भी शुरू हो चुका है। इसके अलावा टूटी झरना, चरण पहाड़ी और माया टुंगरी जैसे प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल भी लोगों की आस्था और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पर्यटन की दृष्टि से इन स्थलों के विकास और बेहतर सुविधाओं के विस्तार से आने वाले समय में रामगढ़ में रोजगार और स्थानीय कारोबार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
पतरातू में बदला बिजली उत्पादन का परिदृश्य
पतरातू थर्मल पावर के पुराने प्लांट को हटाकर एनटीपीसी के साथ संयुक्त वेंचर में नए बिजली उत्पादन प्लांट का निर्माण किया गया। अब यहां बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है। यह परियोजना रामगढ़ के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा सकती है।
लेकिन सबसे बड़ी कमी आज भी रोजगार की
रामगढ़ के विकास की चर्चा के बीच एक महत्वपूर्ण कमी ऐसी है, जो आम लोगों को लगातार खलती है और स्पष्ट रूप से नजर आती है। वह है रोजगार के अवसरों की कमी।
पूर्व में रामगढ़ क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र और कोयला क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के भरपूर साधन उपलब्ध थे। बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका कोलियरी, उद्योग और उनसे जुड़े कारोबार पर निर्भर थी।
लेकिन जिला बनने के बाद सरकारों की उदासीनता और वैश्विक कारणों से कोलियरियों आदि में उत्पादन कम हुआ। बहाली बंद कर दी गई। उत्पादन कम होने के साथ लोकल सेल भी कम हो गया, जहां से स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलता था।
नतीजा यह हुआ कि जिला बनने के बाद जहां बुनियादी सुविधाओं में वृद्धि हुई, वहीं रोजगार के अवसरों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकी।
निजी फैक्ट्रियां आईं, लेकिन रोजगार का सवाल कायम
रामगढ़ जिले में कई निजी लोहा फैक्ट्रियों की स्थापना हुई। इन उद्योगों से जिले की औद्योगिक गतिविधियों को जरूर बढ़ावा मिला, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार के वैसे अवसर नहीं मिल पाए, जिसकी उम्मीद जिला बनने के बाद की गई थी।
इन फैक्ट्रियों का मुख्य उद्देश्य अपने व्यावसायिक लाभ के लिए काम करना है। हालांकि सरकार की कड़ाई के बाद सीएसआर के नाम पर इन फैक्ट्रियों द्वारा कुछ विकास कार्य भी किए जा रहे हैं।कुछ फैक्ट्रियां तो अवैध कोयले कारोबार का केंद्र बन गयी है।
दूसरी ओर, इन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किए जाने की वजह से कई बार दुर्घटनाएं हुई हैं और कई लोगों की जानें भी गई हैं। ऐसे में औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा भी रामगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
अवैध कोयला कारोबार और प्रदूषण भी बड़ी चुनौती
रामगढ़ जिला बनने से पहले जिस तरह यह क्षेत्र अवैध कोयला कारोबार का केंद्र बना हुआ था, जिला बनने के बाद भी इस समस्या पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। अवैध कोयला कारोबार आज भी जिले की प्रमुख समस्याओं में शामिल है।
इसके साथ ही इन दिनों जिले में फैक्ट्रियों द्वारा फैलाया जा रहा प्रदूषण भी एक प्रमुख समस्या बनकर सामने आया है। प्रदूषण के खिलाफ स्थानीय लोगों द्वारा लगातार विरोध किया जाता रहा है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अब जिले के सामने बड़ी चुनौती है।
जिंदल की फैक्ट्री से भी नहीं खुला रोजगार का रास्ता
जिला बनने के बाद देश के प्रमुख औद्योगिक समूह जिंदल की फैक्ट्री बासल, पतरातू में स्थापित की गई। इससे जिले में औद्योगिक विकास की उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन जमीन की कमी के कारण यह फैक्ट्री अपने सारे प्लान को लागू नहीं कर पाई।
इसका असर यह हुआ कि यहां भी स्थानीय लोगों को रोजगार के वैसे विशेष अवसर नहीं मिल पाए, जिसकी उम्मीद इस बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट से की जा रही थी।
19 साल बाद रामगढ़ के सामने सबसे बड़ा सवाल
12 सितंबर 2007 को जिला बनने के बाद रामगढ़ ने निश्चित रूप से विकास के कई पड़ाव पार किए हैं। सड़कें बेहतर हुईं, पुल-पुलियों का निर्माण हुआ, सरकारी भवन और स्कूल बने, नगर परिषद की स्थापना हुई, पेयजल योजनाओं का विस्तार हुआ, उच्च शिक्षा के संस्थान आए, बिजली उत्पादन की नई व्यवस्था बनी और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट जिले में स्थापित हुए।
लेकिन इन उपलब्धियों के साथ एक सवाल आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है—रामगढ़ के युवाओं और स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर आखिर कब पैदा होंगे?
जिला बनने के 19 वर्ष बाद आज आवश्यकता केवल बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की नहीं, बल्कि जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की है। इसके साथ ही औद्योगिक प्रदूषण को कम करना, उद्योगों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराना और उच्च शिक्षा के और अधिक संस्थान खोलना भी समय की मांग है।
रामगढ़ के विकास की अगली कहानी तभी पूरी मानी जाएगी, जब यहां की सड़कें और भवन ही नहीं, बल्कि यहां के युवाओं के भविष्य के रास्ते भी मजबूत होंगे।