रांची / धनबाद, झारखंड : धनबाद रिंग रोड निर्माण से जुड़े बहुचर्चित भूमि घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने करीब एक दशक बाद निर्णायक कार्रवाई करते हुए गुरुवार की देर रत एक दर्जन से अधिक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वर्ष 2015 में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है, जिसे सामाजिक कार्यकर्ता रमेश राही ने दर्ज कराया था।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान में भारी अनियमितता
मामला धनबाद जिले में रिंग रोड निर्माण के लिए की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि रैयतों को मिलने वाले मुआवजे के भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस घोटाले में करीब 300 करोड़ रुपये तक की अनियमितता की आशंका जताई गई है।
जांच में सामने आया कि अंचल, बंदोबस्त, निबंधन और भूमि सुधार विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से नामांतरण, अभिलेख सुधार और मुआवजा भुगतान में नियमों को दरकिनार किया गया।
2014 में हुआ था खुलासा, कार्रवाई में लगी देरी
यह मामला वर्ष 2014 में उजागर हुआ था, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच पहले निगरानी ब्यूरो और बाद में एसीबी को सौंपी। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक और लाल मोहन नायक सहित कई अधिकारियों को निलंबित भी किया गया था। हालांकि, कानूनी अनुमति की प्रक्रिया के कारण आगे की कार्रवाई लंबे समय तक लंबित रही।
अनुमति मिलते ही एसीबी की छापेमारी
आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ACB ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को गिरफ्तार किया। एसीबी सूत्रों के अनुसार, मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां संभव हैं तथा वित्तीय लेन-देन की गहन जांच जारी है।
एफआईआरकर्ता रमेश राही का बयान
एफआईआरकर्ता रमेश राही ने कहा कि धनबाद जिले में भूमि अभिलेखों में अनियमितताओं के कारण आम रैयत वर्षों से परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व और निबंधन से जुड़े कार्यालयों में भ्रष्टाचार की वजह से गरीबों को नुकसान और बिचौलियों को फायदा पहुंचाया गया।
स्थानीय स्तर पर हुआ था विरोध
इस घोटाले को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन भी किया था और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। अब एसीबी की इस कार्रवाई को न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।