बोकारो (झारखंड) : पुष्पा महतो अपहरण एवं हत्या मामले में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद बोकारो एसपी हरविंदर सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार 11 अप्रैल 2026 की देर रात पिंड्राजोरा थाना के सभी 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए कर्मियों में थाना प्रभारी अभिषेक रंजन समेत 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं।
मामले की समीक्षा में यह पाया गया कि शुरुआती जांच में पुलिस ने न सिर्फ देरी की, बल्कि आरोपित को लाभ पहुंचाने की भी कोशिश की गई। युवती के लापता होने की सूचना 24 जुलाई 2025 को दी गई थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज करने में करीब 10 दिन का समय लगा।
एसपी ने पहले थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की थी, लेकिन टीम द्वारा निर्देशों का सही पालन नहीं किया गया। इसके बाद सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में नई एसआईटी बनाई गई, जिसने महज एक दिन में मामले का खुलासा कर दिया।
नई जांच टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर युवती से जुड़े साक्ष्य—हड्डियां, बाल और हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू—बरामद किया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दिनेश और मृतका के बीच प्रेम संबंध था। शादी के दबाव से परेशान होकर आरोपी ने साजिश रचकर युवती को चास कॉलेज के बहाने बुलाया और पास के जंगल में उसकी हत्या कर दी।
जांच के दौरान यह भी आरोप लगे हैं कि थाने के कुछ पुलिसकर्मियों ने आरोपी को बचाने के लिए पैसे लिए और उसके साथ थाने में पार्टी भी की। इसके अलावा, मामले की गोपनीयता भी बनाए नहीं रखी गई।
इस मामले में न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार झारखंड हाई कोर्ट पहुंचा था, जहां से पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की गई थी। इसके बाद ही यह सख्त कार्रवाई सामने आई है।
पुलिस विभाग का कहना है कि पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है और आगे भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।