राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि जादूगोड़ा क्षेत्र में यूरेनियम खनन से प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर भेजी गयी याचिका “स्वतः स्पष्ट” है और इसे उचित ध्यानाकर्षण एवं कार्रवाई के लिए अग्रेषित किया जा रहा है।
सरकारी वकील संजीव कुमार अंबष्ठा ने अपनी याचिका में पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल अंतर्गत जादूगोड़ा एवं आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से चल रहे यूरेनियम खनन कार्यों के कारण आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ रहे कथित दुष्प्रभावों को गंभीर मानवीय संकट बताया है। उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं तथा विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्र में कैंसर, जन्मजात विकृतियां, बांझपन, त्वचा रोग, श्वसन संबंधी बीमारियां एवं लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि खनन अपशिष्ट और रेडियोधर्मी पदार्थों के कारण भूजल, कृषि भूमि एवं फसलों के प्रभावित होने की आशंका लगातार जतायी जाती रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पीने के पानी के स्रोत दूषित हो रहे हैं और सूखे मौसम में खदानों के अपशिष्ट से निकलने वाली धूल लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
संजीव कुमार अंबष्ठा ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में यह भी कहा है कि यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की खदानों में बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी मजदूर संविदा पर कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, विकिरण संबंधी जागरूकता, नियमित स्वास्थ्य जांच एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
याचिका में विस्थापन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि खनन परियोजनाओं के कारण कई आदिवासी परिवार अपनी पारंपरिक जमीन और आजीविका से वंचित हो गये हैं। इससे आर्थिक असुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक संकट भी उत्पन्न हुआ है।
राष्ट्रपति को भेजे गये पत्र में संजीव कुमार अंबष्ठा ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें जादूगोड़ा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन, प्रभावित गांवों का व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण, मुफ्त एवं निरंतर चिकित्सा सुविधा, जल-भूमि-फसल की वैज्ञानिक जांच, मजदूरों के लिए सुरक्षा मानकों में सुधार, विस्थापित परिवारों के लिए उचित मुआवजा एवं पुनर्वास, पर्यावरणीय प्रभाव रिपोर्टों को सार्वजनिक करना तथा आदिवासी समुदायों के लिए विशेष कल्याण पैकेज लागू करना शामिल है।
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा झारखंड सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिये जाने के बाद अब राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की प्रक्रिया पर लोगों की नजरें टिक गयी हैं। जादूगोड़ा क्षेत्र में यूरेनियम खनन और उससे जुड़े स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे लंबे समय से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहे हैं।