रामगढ़, झारखंड: रामगढ़ जिले के चितरपुर प्रखंड के बड़कीपोना निवासी राजदेव दास (55 वर्ष) आर्थिक तंगी के कारण इलाज के लिए भटक रहे थे। दुर्घटना में फेमोरल बोन (कुल्हे की हड्डी) का ‘नेक फ्रैक्चर’ हो जाने के बाद कई निजी डॉक्टरों से परामर्श लिया गया, लेकिन ढाई लाख रुपये से अधिक खर्च की बात बताई गई, जिसे वह वहन करने में असमर्थ थे।
आख़िरकार, निराश होकर उन्होंने सदर अस्पताल, रामगढ़ का रुख किया। यहाँ जिला समन्वयक (DS)डॉ. ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह ने उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनवाया, जिससे इलाज की राह आसान हुई।
इसके बाद, अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञडॉ. सपन कुमार और डॉ. अभिजीत कुमार, साथ ही निश्चेतक चिकित्सक डॉ. तांबा रिज़वी ने मिलकर इस जटिल मामले पर विचार किया और टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी (THR) करने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों की टीम ने चुनौती को स्वीकार करते हुए राजदेव दास के कुल्हे और उसके सॉकेट का सफल प्रत्यारोपण किया। अब राजदेव की स्थिति स्थिर है और वह स्वस्थ रूप से उबर रहे हैं।
यह उदाहरण न केवल सदर अस्पताल की चिकित्सकीय दक्षता को दर्शाता है बल्कि आयुष्मान भारत योजना की सार्थकता को भी उजागर करता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो पा रहा है।