मुआवजे की मांग को लेकर चाल धंसने से मरे लोगों के शवों को सीसीएल के करमा प्रोजेक्ट कार्यालय में रखा

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परिजनों ने मुआवजे व नौकरी की मांग पूरी होने पर शवों को उठाने की बात कही

नीरज अमिताभ

रामगढ़, झारखंड  : रामगढ़ जिला के कुजू ओपी क्षेत्र स्थित सीसीएल के करमा कोलियरी में शनिवार की सुबहअवैध उत्खन्न के दौरान चाल गिरने से चार लोगों की मृत्यू हो गयी तथा तीन घायल हो गये थे। घटना शनिवार के सुबह की है। अवैध उत्खन्न करमा कोलियरी के ओपन कास्ट खदान में की जा रही थी। उक्त स्थल सीसीएल होल्ड एरिया था। इधर हाल के दिनों में हो रही भारी बारिश की वजह से लगभग 15 दिनों से उक्त स्थल से सीसीएल के करमा प्रबंधन ने उत्पादन बंद कर रखा था। अब इस मुद्दे पर ना तो प्रशासन और ना ही सीसीएल के अधिकारी कुछ बोल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मृतकों के परिजनों ने इस मामले में सीसीएल प्रबंधन को दोषी मान लिया है तथा मुआवजे व नौकरी की मांग को लेकर सीसीएल के करमा प्रोजेक्ट के कार्यालय में तीन शवों को रख दिया है।  मांगें पूरी न होने तक शवों को नहीं उठाने की बात कह रहे हैं। साथ ही बॉडी फ्रीजर लाकर शवों को उसमें रख दिया गया है। समाचार लिखे जाने तक रात के 11 बजे तक शव रखे हुये है। मारे गये एक व्यक्ति निर्मल मुंडा का अंतिम संस्कार उसके परिजनों ने कर दिया है।

अब सवाल यह उठता है कि इस दुर्घटना के लिए दोषी कौन है। इस घटना ने यह बात स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र में अवैध कोयले का कारोबार जारी था। कुछ लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। जो अवैध कोयला उत्खन्न करने वालों से कोयला खरीद कर बाहर भेजते थे। बगैर पुलिस के सहमति के अवैध कोयले का कारोबार नहीं हो सकता है। इसलिए इस हुई दुर्घटना से पुलिस प्रशासन मुंह नहीं फेर सकता है।

ऐसा पहली बार हुआ है जब सीसीएल होल्ड एरिया में अवैध उत्खन्न हो रहा था तथा दुघर्टना हुई है। अवैध कोयला के कारोबारियों को रोकना सीसीएल के वश का रोग नहीं हैं। क्योंकि अवैध कारोबारियों को उपर की शह मिली होती है। लेकिन आज हुये मामले में सीसीएल को भी दोषी माना जा सकता है। क्योंकि उसके एरिया में जहां से सीसीएल स्वयं उत्खनन कर रहा था। बारिश के चलते वहां उत्पादन बंद करने के बाद ग्रामीण अवैध उत्खन्न कर रहे थे। लेकिन इसकी कोई सूचना सीसीएल प्रबंधन ने पुलिस, प्रशासन व अपने मुख्यालय को नहीं दी थी। अब यह दुर्घटना सीसीएल के लिए गले की फांस साबित हो रही है। क्योंकि मुआवजा सीसीएल से मांगा जा रहा है। पुलिस प्रशासन भी इस दिशा में कोई विशेष तेजी नहीं दिखा रहा है। क्योंकि ऐसा पहली बार हो रहा है कि अवैध माइनिंग के दौरान हुई दुर्घटना के लिए पुलिस प्रशासन को दोषी न मान कर सीसीएल को दोषी माना जा रहा है।

साथ ही यह भी सवाल उठता है कि मारे गये लोगों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। लेकिन क्या सीसीएल ने लोगों को अवैध खनन करने के लिए बुलाया था। क्या लोग सीसीएल के लिए खनन करने गये थे। अगर नही तो मुआवजा सीसीएल क्यों दे। साथ ही अगर माना जाय तो इसके जिम्मेवार कोयला के अवैध कारोबारी है। जिन्हे पुलिस व प्रशासन से शह मिली हुई है।