रामगढ़ कैंट, झारखंड :केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम संहिताओं, कृषि कानूनों और बढ़ते निजीकरण के खिलाफ विभिन्न श्रमिक संगठनों के राष्ट्रव्यापी बंद का असर मंगलवार को रामगढ़ जिले में मिला-जुला देखने को मिला।
जहां शहरी क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य रहा और दुकानों व कार्यालयों पर कोई खास असर नहीं दिखा, वहीं कोयला खनन क्षेत्रों में बंद का व्यापक प्रभाव देखा गया। जिले के बरकाकाना, रजरप्पा, कुजू, अरगड्डा, हजारीबाग और बरका सयाल जैसे सीसीएल के प्रमुख कोयला प्रक्षेत्रों में उत्पादन और डिस्पैच पूरी तरह ठप रहा।
बारिश के बावजूद श्रमिक संगठनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ता सुबह से ही बंद को सफल बनाने में जुटे रहे। कोलियरियों में जुलूस निकाल कर उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। नेताओं का आरोप है कि नए श्रम कानून श्रमिकों के अधिकारों को कुचलते हैं और सरकार देश के सार्वजनिक उपक्रमों का तेजी से निजीकरण कर रही है, जो मज़दूर हित में नहीं है।
बंद का असर बैंकिंग सेवा पर भी पड़ा। स्टेट बैंक को छोड़ अधिकांश बैंकों की शाखाएं बंद रहीं, जिससे आम नागरिकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा लंबी दूरी के वाहनों के आवागमन पर भी असर पड़ा। बुधवार को कई दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले ट्रक व बसें नहीं पहुंचीं।
सीसीएल की केंद्रीय वर्कशॉप नयानगर, रजरप्पा वाशरी और हजारीबाग क्षेत्र में भी बंद का असर देखा गया। श्रमिक संगठनों ने इन स्थलों पर धरना और विरोध प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताया।