रामगढ, झारखंड : जिला अधिवक्ता संघ रामगढ़ की कार्यकारिणी की बैठक में अधिवक्ता पवन कुमार सिंह और अजय कुमार सिंह की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
मामला क्या है ?
संघ के संज्ञान में यह बात आई कि दोनों अधिवक्ताओं पर पांच आपराधिक मामले व्यवहार न्यायालय रामगढ़ एवं पतरातु थाना में लंबित हैं। इसके बाद महासचिव ने दोनों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा और जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया।
जांच में क्या सामने आया ?
जांच कमेटी ने पाया कि वर्ष 2022 और 2023 में जिला अधिवक्ता संघ में एनरोलमेंट के दौरान दोनों ने अंडरटेकिंग व शपथ पत्र दाखिल कर यह उल्लेख किया था कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। जबकि वास्तविकता में उनके खिलाफ निम्न मामले दर्ज थे –
ये मामले 2016 से 2020 के बीच दर्ज हुए थे और अभी भी लंबित हैं।
कार्यकारिणी का निर्णय
तथ्यों को छुपाए जाने को गंभीर मामला मानते हुए कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से दोनों अधिवक्ताओं की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया। साथ ही इसकी सूचना स्टेट बार काउंसिल ऑफ झारखंड और रजिस्ट्रार व्यवहार न्यायालय रामगढ़ को भेजने का भी फैसला लिया गया।
पांच सदस्यीय जाँच कमेटी ने जाँच की
इस संबंध में रामगढ़ अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष ऋषि कुमार महतो ने बताया कि किसी ने इन दोनो अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकायत की थी। श्री महतो ने कहा कि जिस पर रामगढ़ अधिवक्ता संघ ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी उनके नेतृत्व में बनायी। जांच के बाद यह पाया गया कि जब दोनो अधिवक्ताओं ने रामगढ़ अधिवक्ता संघ में सदस्यता के लिए आवेदन दिया था। उस वक्त इनलोगों ने दिये आवेदन व एफिडेविट में अपने उपर कोई मुकदमा नहीं दर्ज होने की बात कही थी। इन लोगों पर पांच केस रामगढ़ और पतरातू थाना में अधिवकता संघ मे आवेदन देने से पूर्व से ही दर्ज थे। इसकी रिपोर्ट हमलोगों ने संघ के कार्यकारिणी को दिया तथा उसमें लिखा कि इनलोगों ने शपथ पत्र में गलत जानकारी दी है। अतः इनकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। इसके बाद संघ के कार्यकारिणी में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुये दोनो अधिवक्ताओं की सदस्यता समाप्त कर दी।