कोल कंपनी के अनिवार्य सैंपलिंग शर्त वापसी ली, कोयला कारोबारियों में खुशी की लहर

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सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी के प्रयास से हुआ बड़ा निर्णय, मजदूर और व्यापारियों ने जताया आभार

कुजू (रामगढ), झारखंड : कोल कंपनी ने एक नवंबर से कोयले की अनिवार्य सैंपलिंग की शर्त को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले से कोयला व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से व्यापारी इस व्यवस्था का विरोध कर रहे थे, क्योंकि सैंपलिंग की प्रक्रिया समय लेने वाली होने के साथ-साथ कोयला उठाव और बिक्री पर नकारात्मक असर डाल रही थी।

कंपनी का यह फैसला गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी के सार्थक प्रयासों का परिणाम बताया जा रहा है। सांसद ने कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया और सीसीएल प्रबंधन के समक्ष स्थानीय व्यापारियों की समस्याओं को मजबूती से उठाया था। उन्होंने तर्क दिया था कि अनिवार्य सैंपलिंग से छोटे व्यापारियों का काम प्रभावित हो रहा है और स्थानीय आर्थिक गतिविधियाँ बाधित हो रही हैं।

लगातार संवाद और पहल के बाद अंततः कंपनी ने कारोबारियों की मांगों को स्वीकार करते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

निर्णय की घोषणा होते ही झारखंड कोल ट्रेडर्स ट्रस्ट के अध्यक्ष काशीनाथ महतो, मजदूर, रैयत विस्थापित व सेल संचालन समिति के अध्यक्ष राजेश्वर गंझू, मांडू विधायक प्रतिनिधि सह एजेकेएसएस क्षेत्रीय सचिव रामभजनलाल महतो सहित कई प्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल व्यापारियों के लिए राहत भरा है, बल्कि इससे कोयले के विपणन में पारदर्शिता और गति भी आएगी। मजदूर वर्ग ने भी इस फैसले का स्वागत किया, क्योंकि इससे कोयला लोडिंग और ढुलाई कार्य में आ रही बाधाएं समाप्त होंगी।

मजदूर नेता रामभजनलाल महतो ने कहा कि इस निर्णय से विस्थापितों को वैकल्पिक रोजगार के अवसर बरकरार रहेंगे। पूर्व की व्यवस्था से मजदूरों और ग्रामीणों के साथ-साथ कोयला कारोबारियों के सामने रोजगार संकट की स्थिति बन गई थी।