रामगढ़, झारखंड : भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी का 31 अक्तूबर को शहादत दिवस था। 31 अक्तूबर 1984 को उनके अपने ही सुरक्षा कर्मियों ने गोली चलाकर उनकी हत्या कर दी थी। इस दिन को देशभर में शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। आम लोगों के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी देश के विभिन्न हिस्सों में स्व. इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
हर वर्ष रामगढ़ शहर समेत पूरे जिले में भी इस दिन कांग्रेसजनों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है । लेकिन इस वर्ष स्थिति बिल्कुल भिन्न रही। 31 अक्तूबर को न तो किसी सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ और न ही सोशल मीडिया पर ही कांग्रेसजनों ने स्व. इंदिरा गांधी को याद किया।
दरअसल, 31 अक्तूबर को रामगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त जिलाध्यक्ष एवं विधायक ममता देवी के श्वसुर का श्राद्ध भोज आयोजित था। इस कार्यक्रम में जिले के अधिकांश कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे। आयोजन की तैयारियों और अतिथियों के स्वागत-सत्कार में सभी कांग्रेसजन व्यस्त रहे, जिसके चलते वे स्व. इंदिरा गांधी के शहादत दिवस को भूल गए।
इसके साथ ही कांग्रेसजनों ने लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती भी नहीं मनाई। जबकि जिले के विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और संगठनों ने सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए। केवल रामगढ़ पेंशनर कल्याण समाज ही ऐसा संगठन रहा जिसने अपने कार्यक्रम में स्व. इंदिरा गांधी की शहादत दिवस और सरदार पटेल की जयंती दोनों को एक साथ मनाया।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घटना की चर्चा जोरों पर है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि विधायक या जिलाध्यक्ष किसी पारिवारिक कारणवश व्यस्त हों, तो क्या पार्टी के सारे कार्य रुक जाने चाहिए ? हाल ही में कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद के लिए हुए चयन में दर्जनों दावेदार थे । लेकिन किसी ने भी 31 अक्तूबर को इन दोनों महान नेताओं को याद करने की पहल नहीं की। अभी कुछ दिन पूर्व ही दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हुआ था। क्रिया क्रम के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शासन के सभी कार्य लगातार निपटाते रहे तथा शिक्षा मत्री रामदास सोरेन के निधन तत्काल सोशल मीडिया व बयानो से दुख जताया था।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आज कांग्रेस कार्यकर्ताओं में पार्टी और उसके नेताओं के प्रति समर्पण की भावना कमजोर होती जा रही है। अब पार्टी से जुड़ाव वैचारिक प्रतिबद्धता के बजाय व्यक्तिगत लाभ और पद की आकांक्षा से प्रेरित दिखाई देता है।