प्रमण्डलीय आयुक्त, उत्तरी छोटानागपुर द्वारा महत्वपूर्ण अधिनियमों पर कार्यशाला आयोजित

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■ राजस्व एवं वन–भूमि संबंधी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा

रामगढ़, झारखंड : समाहरणालय रामगढ़ के सभागार में शनिवार को उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार की अध्यक्षता में राजस्व अभिलेख, भूमिधारण, किरायेदारी अधिकार एवं वन क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर केंद्रित एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला भू-राजस्व एवं भूमि सुधार से संबंधित विभिन्न अधिनियमों के तहत लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

कार्यशाला के दौरान निम्नलिखित अधिनियमों और उनकी महत्वपूर्ण धाराओं पर विभागीय अधिकारियों द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।

1. The Bihar Tenants Holding (Maintenance of Records) Act, 1973
धारा 14, 15, 16 एवं 18 से संबंधित मामलों पर चर्चा करते हुए किरायेदारी अभिलेखों के अद्यतन, धारणाधिकार की पुष्टि, रिकॉर्ड के अनुरक्षण, त्रुटि-सुधार तथा राजस्व अभिलेखों में आवश्यक संशोधनों की प्रगति की समीक्षा की गई।

2. CNT Act, 1908
धारा 46 एवं 49 से जुड़े भूमिहस्तांतरण प्रतिबंध, अवैध रूपांतरण, पुश्तैनी भूमि संरक्षण एवं परंपरागत अधिकारों के संरक्षण से संबंधित मामलों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई। प्रमंडलीय आयुक्त ने इन प्रावधानों के कड़ाई से अनुपालन का निर्देश दिया।

3. BLR Act, 1950
धारा 4(h) के तहत अवैध कब्जा, अनधिकार, जमाबंदी रद्दीकरण एवं भूमि पुनर्वितरण से जुड़े लंबित प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।

4. JBCA, Forest Act एवं खास महल अधिनियम
वन-भूमि विवाद, अतिक्रमण, सीमांकन, विभागीय समन्वय तथा केस–हिस्ट्री संबंधी बिंदुओं पर विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व एवं वन-भूमि से जुड़े सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशीलतापूर्वक निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों का नियमित अद्यतन न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाता है, बल्कि आम नागरिकों को होने वाली समस्याओं को भी कम करता है। विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विवादों का शीघ्र समाधान करना अत्यंत आवश्यक है।

अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक विलंब आम जन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। अतः सभी अधिकारी उच्च प्राथमिकता के आधार पर लंबित प्रकरणों का निपटारा सुनिश्चित करें। इस दौरान वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, प्रभारी पदाधिकारी गोपनीय शाखा, भू अर्जन पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, अंचल अधिकारियों सहित अन्य उपस्थित थे।