सीबीएसई पटना की ट्रेनिंग में शिक्षकों को मिली नवीनतम शिक्षण विधियों की जानकारी

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रामगढ़, झारखंड : रामगढ़ के विकास नगर स्थित श्री कृष्ण विद्या मंदिर में सीबीएसई पटना द्वारा शिक्षकों के लिए एक दिवसीय  सीबीपी   (कैपिसीटी बिल्डिंग प्रोग्राम) ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र का विषय “एनवायरमेंटल एजुकेशन एंड कंजर्वेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्स” रहा।

कार्यक्रम का उद्घाटन सीबीएसई के रिसोर्स पर्सन शाहिद अहमद (DAV भरेचनगर) एवं अपर्णा मिश्रा (DAV बरकाकाना) द्वारा किया गया। विद्यालय के प्राचार्य सह वेन्यू डायरेक्टर एम. कृष्णा चंद्रा ने पुष्पगुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका सपना चक्रवती, विजय तिवारी, रंजू सिंह एवं रंजन बोस भी उपस्थित रहे।

सभी के सहयोग से प्रमुख रिसोर्स पर्सन ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। विद्यालय के संगीत शिक्षक प्रांतिक रॉय के सहयोग से कक्षा षष्ठी, सप्तमी एवं नवमी की छात्राओं ने मधुर स्वागत गान प्रस्तुत कर विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों एवं अतिथियों का मन मोह लिया। तालियों की गूंज के बीच रिसोर्स पर्सन का स्वागत किया गया।

इस ट्रेनिंग सेशन में श्री गुरु नानक पब्लिक स्कूल, रामगढ़ से 15 शिक्षक-शिक्षिकाएं, श्री कृष्ण विद्या मंदिर से 33 शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा झारखंड पब्लिक स्कूल, डकरा कोलियरी से 12 शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं उनके प्राचार्य अभिषेक कुमार चौहान उपस्थित रहे। कुल मिलाकर लगभग 60 शिक्षकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण विधियों, छात्रों के सीखने के परिणामों के बेहतर मूल्यांकन तथा पर्यावरण संरक्षण में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही नवीनतम तकनीकी शिक्षण विधियों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागी शिक्षकों एवं रिसोर्स पर्सन के लिए चाय, नाश्ता एवं भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी। वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण हम सभी के सामूहिक प्रयास से ही संभव है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की प्रबंध समिति एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता) ने सीबीएसई द्वारा आयोजित इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए इसे शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।