दुमका : मंदिरों के गांव मलूटी के विकास का मुद्दा फिर सुर्खियों में, सांसद नलिन सोरेन बोले : लोकसभा में उठेगी आवाज

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दुमका, झारखंड: पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थल मलूटी गांव के संरक्षण और विकास का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया है। दुमका सांसद नलिन सोरेन ने कहा है कि मलूटी के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार का विषय वह संसद में मजबूती के साथ उठाएंगे। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मलूटी को वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसकी उम्मीद वर्षों से की जा रही थी।

मलूटी मंदिरों का ऐतिहासिक महत्व

दुमका जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित मलूटी गांव को पुरातात्विक धरोहर का दर्जा प्राप्त है। यहां 17वीं–18वीं सदी में निर्मित लगभग 72 मंदिर मौजूद हैं। इनमें से 58 मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं, जबकि शेष मंदिर मां दुर्गा, मां काली और अन्य देवी-देवताओं के हैं। इतिहास के अनुसार यह क्षेत्र राजा बसंत राय और उनके राजवंश से जुड़ा रहा है, जिनके द्वारा 1690 से 1840 ई. के बीच इन मंदिरों का निर्माण कराया गया था। यहां का प्रमुख आकर्षण मां मौलिक्षा का मंदिर है, जबकि पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर भी मलूटी से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

संरक्षण कार्य अब भी अधूरा

करीब चार से पांच शताब्दी पुराने इन मंदिरों के जीर्णोद्धार की जरूरत 1990 के बाद गंभीरता से महसूस की गई। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मलूटी को पूर्ण रूप से विकसित धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में तैयार नहीं किया जा सका। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मलूटी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य की ऑनलाइन शुरुआत की थी, लेकिन अपेक्षित प्रगति अब तक नजर नहीं आती।

संसद में उठेगी आवाज

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की उम्मीदें एक बार फिर जग गई हैं। सांसद नलिन सोरेन ने आश्वासन दिया है कि मलूटी को बेहतर पर्यटन केंद्र बनाने, मंदिरों के संरक्षण को गति देने और क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करने के लिए वे संसद में मजबूत पहल करेंगे। उनका कहना है कि मलूटी के पुनर्जीवन से न सिर्फ धार्मिक आस्था को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नया आधार मिलेगा।