ओशो फ्रेगरेंस ध्यान शिविर के द्वितीय दिवस में साक्षी साधना, आंतरिक शांति और भावनात्मक मुक्त‍ि पर विशेष सत्र

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ध्यान, शांति एवं चेतना जागरण से प्रतिभागियों ने किया आंतरिक अनुभव

रामगढ, झारखंड : ओशो फ्रेगरेंस ध्यान शिविर के द्वितीय दिवस की शुरुआत ज्ञान की सुबह के प्रथम सत्र से हुई। इस सत्र में श्वास अभ्यास, आत्मचेतना और गहन विश्राम की प्रक्रिया कराई गई। आचार्य स्वामी दिगंबर जी द्वारा “मैं कौन हूँ” के प्रति जागरूकता पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया। प्रतिभागियों को आंखों पर पट्टी और कानों में प्लग लगाकर विश्राम कराया गया, जिससे उन्हें गहरी शांति का अनुभव हुआ।

द्वितीय सत्र: काम-क्रोध मुक्ति एवं शांति के उपाय

इस सत्र का उद्घाटन ओशो फ्रेगरेंस के हिमालय स्वामी शैलेंद्र सरस्वती के आगमन के साथ हुआ। भक्ति गीतों के बीच उपस्थित लोगों ने उनका स्वागत किया। स्वामी जी ने चिंता, डिप्रेशन और अज्ञात भय से मुक्ति के उपाय समझाए। उन्होंने कहा कि जीवन का स्वभाव अनिश्चितता है और साक्षी भाव की साधना से मन शांत होता है। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि धैर्य और साक्षी भाव जीवन में शांति लाता है। साथ ही सातों चक्रों और संगीत के स्वर ‘सा रे गा मा पा धा नि सा’ के माध्यम से चेतना केंद्रों के सक्रियण की थेरपी कराई गई।

तीसरा सत्र: संकल्प ‘ओम ध्यान’

अंतिम सत्र में ‘ओम ध्यान’ साधना कराई गई, जिसमें प्रतिभागियों ने रोकर, हँसकर, गाकर, कूदकर और अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए ध्यान में प्रवेश किया। लगातार ‘ओम’ उच्चारण से वातावरण ऊर्जावान हो उठा। अंत में गहन विश्राम के साथ सत्र पूर्ण हुआ और ओशो वंदना के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया।