रांची, झारखंड : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड महागठबंधन सरकार में जल्द ही बड़े स्तर पर राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार खरमास समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और विभागीय फेरबदल लगभग तय माना जा रहा है। इसे लेकर सत्तारूढ़ दलों के बीच मंथन तेज हो गया है और दिल्ली से भी संकेत सकारात्मक बताए जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो महागठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस कोटे से तीन मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि दो नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कोटे से भी दो मंत्रियों की छुट्टी और दो नए विधायकों को मंत्री बनाए जाने की चर्चा जोरों पर है।
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, खाद्य आपूर्ति, ग्रामीण विकास और वित्त विभागों में बदलाव की संभावना सबसे अधिक है। विशेष रूप से ग्रामीण विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार के भीतर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। कई जिलों में योजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं रहने, विधायकों की लगातार शिकायतें आने और विभागीय समन्वय की कमी के कारण यह विभाग नेतृत्व परिवर्तन की जद में बताया जा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी विभागीय प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस के बेरमो विधायक अनूप सिंह का नाम मजबूती से उभर रहा है। बताया जाता है कि पूर्व में भी उनका नाम मंत्री पद के लिए अंतिम दौर तक पहुंचा था, लेकिन तब समीकरण बदल गए थे।
वित्त विभाग को लेकर भी फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त मंत्री की कार्यशैली को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में असंतोष है। ऐसे में वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव को दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपे जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वे प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ कांग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं।
कांग्रेस आलाकमान इस बार मंत्रिमंडल में लैंगिक संतुलन पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। पार्टी के भीतर इस बात पर चर्चा है कि कम से कम एक महिला मंत्री का प्रतिनिधित्व जरूर बना रहना चाहिए। इसी आधार पर मंत्रिमंडल के संभावित समीकरणों पर मंथन जारी है। पाकुड़ विधायक आलमगीर आलम की पत्नी निशित आलम को भी मंत्री बनाये जाने की चर्चा है
अन्य चर्चाओं में झामुमो से घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन और राजद से सुरेश पासवान को अवसर दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस विस्तार में झामुमो, कांग्रेस और राजद—तीनों दल जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखेंगे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार संभावित मंत्रिमंडल विस्तार सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने और जनता के बीच भरोसा मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।