रामगढ, झारखंड : झारखंड के रामगढ़ जिले में झारखंड पेंशनर कल्याण समाज, रामगढ़ जिला कार्यालय (अनुमंडल परिसर) में स्वतंत्रता संग्राम के महायोद्धा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सर्वप्रथम पेंशनरों द्वारा नेताजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के सचिव श्री छोटू मोदी ने की। सभा को संबोधित करते हुए संरक्षक श्री बलराम सिंह ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का चरित्र इतना उज्ज्वल था कि हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी उनके नेतृत्व में देश के लिए मर-मिटने को तैयार रहते थे। उन्होंने कहा कि धन की आवश्यकता पड़ने पर नेताजी के जन्मदिन पर उन्हें सोने से तौला गया था। रंगून के मुस्लिम व्यापारी हबीब ने अपना सर्वस्व बेचकर उस समय के एक करोड़ रुपये में वह स्वर्ण माला खरीदी थी, जो नेताजी को पहनाई गई थी।
सभा को संबोधित करते हुए सचिव श्री छोटू मोदी ने कहा कि रामगढ़ अधिवेशन के बाद अप्रैल 1940 में सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया गया, लेकिन आंदोलन का विस्तार पूरे भारत में नहीं हो सका और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित फॉरवर्ड ब्लॉक के सभी नेता गिरफ्तार कर लिए गए। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी 1941 को नेताजी पठान ‘मोहम्मद जियाउद्दीन’ के वेश में कोलकाता से धनबाद, गोमो, पेशावर होते हुए काबुल पहुंचे थे।
संरक्षक श्री दिलीप साहा ने अपने संबोधन में कहा कि 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की थी। युद्ध प्रारंभ करने से पूर्व 6 जुलाई 1944 को आजाद हिंद रेडियो प्रसारण में नेताजी ने महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया और उनसे आशीर्वाद मांगा था।
सभा में उपस्थित अन्य सदस्यों ने भी नेताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सभी पेंशनरों ने बनारस में इलाजरत झारखंड पेंशनर कल्याण समाज, रामगढ़ के जिला अध्यक्ष के शीघ्र स्वस्थ लाभ की कामना की।
कार्यक्रम में सचिव छोटू मोदी, संरक्षक बलराम सिंह, शिवशंकर मोदी, दिलीप साहा, कार्यालय सचिव अशोक गुप्ता, देवशरण महतो, भुनेश्वर मोदी, भुनेश्वर ठाकुर, शुशीला देवी, रामप्रसाद महतो, दूधेश्वर महतो, बसंत महतो, लाल बहादुर चौधरी, सत्येंद्र प्रसाद सहित कई पेंशनर उपस्थित थे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन श्री दिलीप साहा ने किया।