जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), झारखंड : जमशेदपुर के प्रसिद्ध उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र एवं युवा कारोबारी 24 वर्षीय कैरव गांधी को 14 दिनों बाद अपहर्ताओं के चंगुल से सकुशल मुक्त करा लिया गया है। मंगलवार तड़के करीब 4:30 बजे वे अपने आवास पहुंचे, जिसके बाद परिवार और शहरवासियों ने राहत की सांस ली।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कैरव गांधी को झारखंड के हजारीबाग और बिहार के गया जिले की सीमा क्षेत्र से सुरक्षित बरामद किया गया। इस संबंध में जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय ने पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता पीड़ित की सुरक्षा थी, जिसमें सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 13 जनवरी को दिन के समय कैरव गांधी अपनी क्रेटा कार से घर से निकले थे। उन्होंने परिजनों को बताया था कि वे पहले बिष्टुपुर स्थित एसबीआई शाखा जाएंगे, फिर आदित्यपुर स्थित अपनी कंपनी पहुंचेंगे और दोपहर के भोजन के लिए वापस लौट आएंगे। हालांकि दोपहर 1:45 बजे तक उनके घर नहीं लौटने और मोबाइल फोन बंद मिलने पर परिजनों ने तलाश शुरू की।
कुछ समय बाद परिजनों को एक विदेशी नंबर से कॉल आया, जिसमें अपहरण की जानकारी देते हुए 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी, जो बाद में बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सात विशेष जांच टीमों (SIT) का गठन किया था, जो झारखंड के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में लगातार कार्रवाई कर रही थीं। इसी क्रम में दो दिन पहले झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा स्वयं जमशेदपुर पहुंचीं और पूरे मामले की समीक्षा की थी।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कैरव गांधी की रिहाई पूरी तरह पुलिस कार्रवाई का परिणाम है या इसमें अन्य प्रयास भी शामिल रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
कैरव गांधी की सुरक्षित वापसी से जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) में राहत और संतोष का माहौल है।