जमशेदपुर (झारखंड) : शहर में पहुंची दुनिया की सबसे छोटी “मिनी गाय”, गौरी-गोपाल बने आकर्षण का केंद्र

Spread the love

जमशेदपुर (झारखंड) : जमशेदपुर शहर में इन दिनों एक अनोखी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। गोलमुरी के केबल टाउन निवासी मोहित गुप्ता और उनके भाई अपने घर ऐसी खास मेहमान लेकर आए हैं, जिसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है—दुनिया की सबसे छोटी मानी जाने वाली “मिनी गाय”।

पुंगनूर गाय नस्ल की यह मिनिएचर गाय अपने बेहद छोटे आकार के कारण खास पहचान रखती है। महज करीब 18–20 इंच ऊंचाई और लगभग 20–25 किलो वजन वाली यह गाय देखने में जितनी आकर्षक है, उतनी ही शांत स्वभाव की भी मानी जाती है। मोहित गुप्ता ने इसके साथ एक बछिया और एक बछड़ा भी लाया है, जिनका नाम “गौरी” और “गोपाल” रखा गया है।

बताया जाता है कि इस अनोखी गाय को देखने के लिए लोग दूर-दूर से जमशेदपुर पहुंच रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए यह कौतूहल का केंद्र बन गई है। घर के बच्चे जहां मोबाइल छोड़कर गाय के साथ समय बिता रहे हैं, वहीं महिलाएं इसकी देखभाल बिल्कुल अपने बच्चों की तरह कर रही हैं—नहलाना, खिलाना और दुलार करना उनके रोजमर्रा का हिस्सा बन गया है। घर की महिलायें इन मिनी गाय व मिनी बछड़े को फीडिंग बोतल से दूध पिला रहीं हैं ।

मोहित गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने इस खास नस्ल की गाय को लाने का फैसला तब किया, जब उन्होंने नरेंद्र मोदी को मिनी गाय की सेवा करते देखा। इसके बाद उन्होंने और उनके भाई ने इस नस्ल की खोज शुरू की और अंततः आंध्र प्रदेश की एक गौशाला से करीब 8.75 लाख रुपये में इसे खरीदा। आवश्यक प्रमाणपत्र लेकर वे दो दिनों में इसे जमशेदपुर लेकर पहुंचे।

इस पहल के पीछे दोनों भाइयों का उद्देश्य केवल शौक नहीं, बल्कि संस्कृति से जुड़ाव भी है। उनका कहना है कि आज के समय में लोग पालतू जानवरों के रूप में कुत्ते-बिल्ली पालने की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जबकि भारतीय परंपरा में गाय का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में वे इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुंगनूर नस्ल की गाय दुनिया की सबसे छोटी गायों में गिनी जाती है और इसकी देखभाल अपेक्षाकृत आसान होती है। कम जगह में भी इसे पाला जा सकता है और यह प्रतिदिन लगभग एक लीटर दूध देती है।

फिलहाल “गौरी” और “गोपाल” न केवल एक परिवार की खुशियों का कारण बने हैं, बल्कि पूरे शहर में चर्चा का विषय बनकर लोगों को अपनी संस्कृति और परंपरा की याद भी दिला रहे हैं।