रामगढ़ (झारखंड) : जिले के पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने उपायुक्त को एक विस्तृत आवेदन देकर क्षेत्र से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया है। इस संबंध में उन्होंने अपने आवासीय कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित कर पूरे मामले की जानकारी दी।
पूर्व विधायक ने अपने आवेदन में लोहार टोला स्थित होलिका दहन की जमीन, केसर-ए-हिंद जमीन पर कथित अवैध कब्जा और बिहार फॉउंडरी कास्टिंग लिमिटेड (बीएफसीएल) समेत अन्य औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण को प्रमुख चिंता का विषय बताया है।
उन्होंने कहा कि इन मामलों को लेकर उन्होंने पहले भी कई बार प्रशासन को पत्र लिखा, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी न तो समस्याओं का समाधान किया गया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई। उन्होंने अंचल अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि या तो उन्हें राजस्व संबंधी जानकारी नहीं है या फिर वे किसी एक पक्ष को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि लगभग 3 एकड़ केसर-ए-हिंद जमीन, जो राष्ट्रपति के नाम पर दर्ज होती है, उस पर अवैध रूप से कब्जा कर बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया है। वहां झोपड़ी और गुमटी बनाकर एक दबंग परिवार द्वारा लाखों रुपये का मासिक किराया वसूला जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले एक अंचल अधिकारी द्वारा इस मामले में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन बाद में कथित रूप से पैसे लेकर मामला दबा दिया गया। ऐसे में प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रदूषण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बीसीसीएल सहित कई फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और कचरा स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसके बावजूद इन इकाइयों का न तो नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और न ही किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इन फैक्ट्रियों में रोजाना 500 से 600 ट्रकों का आवागमन होता है, जिनमें से लगभग 400 ट्रक केवल बीएफसीएल से जुड़े होते हैं। ये ट्रक ओवरलोड होकर चलते हैं, जिससे सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं और हादसों की आशंका बढ़ रही है। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा प्रभावी जांच नहीं की जा रही है।
पूर्व विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि जहां छोटे-छोटे मामलों में कार्रवाई होती है, वहीं बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रशासनिक चुप्पी क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इससे आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
अंत में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे 2 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपायुक्त कार्यालय के मुख्य द्वार पर अकेले धरना देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर धरने की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जिले में प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यशैली को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।