सरकारी वकील संजीव कुमार अंबष्ठा ने झारखंड में पुनर्वास एवं विस्थापन आयोग के गठन की मांग उठाई

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रामगढ़, झारखंड :  जी.पी. रामगढ़ के श्री संजीव कुमार अंबष्ठा ने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार, रांची को पत्र लिखकर राज्य में भूमि अधिग्रहण के कारण विस्थापित परिवारों की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।

उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य में औद्योगिक, खनन, सिंचाई तथा विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से लगभग 1.57 लाख परिवार प्रभावित हुए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या आज भी समुचित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लाभ से वंचित है।

उन्होंने बताया कि पुनर्वास नीतियों तथा “उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013” के प्रावधानों के बावजूद अनेक प्रभावित परिवारों को अब तक उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। कई मामलों में मुआवजा वर्षों तक लंबित रहा है या वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं दिया गया है, जिससे परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

श्री अंबष्ठा ने कहा कि कृषि भूमि छिन जाने के कारण अधिकांश परिवारों की आजीविका समाप्त हो गई है। प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को रोजगार देने के वादे भी अधिकांश मामलों में पूरे नहीं हुए हैं, जिसके कारण लोग बेरोजगारी, गरीबी और पलायन के लिए मजबूर हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि कई स्थानों पर पुनर्वास कॉलोनियां या तो बनी ही नहीं हैं या उनमें पेयजल, सड़क, स्वच्छता, विद्यालय एवं स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कुछ परिवारों को तो बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास के बार-बार विस्थापन का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र के अभाव में विस्थापित परिवारों की समस्याएं और गंभीर हो गई हैं। विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य कमजोर वर्गों पर इसका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी पड़ा है।

श्री अंबष्ठा ने यह भी बताया कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पुनर्वास एवं विस्थापन आयोग के गठन को स्वीकृति दी जा चुकी है, लेकिन अब तक इस आयोग का गठन कर उसे क्रियाशील नहीं बनाया गया है।

इस संदर्भ में उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पुनर्वास एवं विस्थापन आयोग का शीघ्र गठन कर उसे कार्यात्मक बनाया जाए, ताकि लगभग 1.57 लाख प्रभावित परिवारों की लंबित समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और उन्हें उनका वैधानिक अधिकार मिल सके।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार इस गंभीर विषय पर त्वरित और सकारात्मक कदम उठाएगी।