रामगढ़ (झारखंड) : रामगढ़ के सरकारी अधिवक्ता संजीव अम्बष्ठा ने रांची स्थित जगन्नाथ मंदिर में तैनात एक निजी सुरक्षा गार्ड की हत्या की घटना पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में आई खबरों के अनुसार मृतक गार्ड श्री बिरसा मुंडा आदिवासी समुदाय से थे और उन्हें मात्र ₹1500 प्रति माह का बेहद कम वेतन दिया जा रहा था, जो लंबे समय से बकाया भी था।
श्री अम्बष्ठा ने इसे बेहद चौंकाने वाली स्थिति बताते हुए कहा कि राज्य के इतने प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर की सुरक्षा केवल एक अल्प वेतनभोगी निजी गार्ड के भरोसे छोड़ दी गई थी। यह न केवल सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही दर्शाता है, बल्कि श्रम कानूनों के उल्लंघन का भी स्पष्ट मामला है।
उन्होंने कहा कि ₹1500 प्रतिमाह वेतन देना न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 का उल्लंघन है। साथ ही, समय पर वेतन नहीं देना भुगतान वेतन अधिनियम, 1936 के खिलाफ है। यदि जांच में शोषण के अन्य पहलू सामने आते हैं, तो यह बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत भी दंडनीय हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई है और वे गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। इस घटना को लेकर आदिवासी समुदाय में भी गहरा आक्रोश और दुख व्याप्त है।
श्री अम्बष्ठा ने झारखंड सरकार से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाए और मृतक के परिजनों को सरकार व मंदिर प्रबंधन की ओर से उचित मुआवजा व पुनर्वास सहायता दी जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की भी मांग की गई है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले में जल्द और उचित कार्रवाई करेगी।