2009 में अधिसूचित हुआ था हेसला पंचायत
पत्र में उल्लेख किया गया है कि हेसला पंचायत को वर्ष 2009 में अधिसूचित किया गया था। इसके बाद से यहां पीढ़ियों से रह रहे मूल रैयत, परिवार और स्थानीय लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेते आ रहे हैं। बताया गया कि इस पंचायत में करीब 900 से अधिक परिवारों के 4000 से ज्यादा लोग निवास करते हैं और यह उनका स्थायी पहचान स्थल है।
222 एकड़ जमीन अधिग्रहण पर उठे सवाल
पत्र में कहा गया है कि 222 एकड़ जमीन के कथित अधिग्रहण और विस्थापन की प्रक्रिया को लेकर अब तक कोई अधिकृत दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूर्व जवाब और कोर्ट में मामला
उपायुक्त कार्यालय हजारीबाग से 7 मार्च 2022 को प्राप्त जवाब का हवाला देते हुए बताया गया कि सरकार के पास अधिग्रहण से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद जब जमीन खाली कराने की बात सामने आई तो प्रभावित लोगों ने झारखंड उच्च न्यायालय में W.P.(C) No.-4048/2017 के तहत याचिका दायर की। सरकारी पक्ष ने अपने जवाब में 222 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से इनकार करते हुए केवल 12.59 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की बात स्वीकार की है।
स्पष्टता और कार्रवाई की मांग
बन्धु तिर्की ने पत्र में कहा है कि सरकारी विभागों के बयानों में विरोधाभास और अस्पष्टता दिखाई दे रही है। उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही यदि तथ्यों के आधार पर अधिग्रहण की बात सही नहीं पाई जाती है तो वहां रह रहे परिवारों को किसी भी परिस्थिति में बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास के विस्थापित न किया जाए।
संलग्न दस्तावेज भी भेजे गए
इस मामले से संबंधित अन्य दस्तावेजों की छाया प्रति भी पत्र के साथ संलग्न की गई है, ताकि प्रशासन पूरे प्रकरण की गहन जांच कर उचित निर्णय ले सके।