देवघर (झारखंड) : करीब 16 साल पुराने सड़क जाम प्रकरण में एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें सशर्त जमानत भी प्रदान कर दी गई।
वहीं, इस मामले में साक्ष्य के अभाव में पूर्व भाजपा विधायक रणधीर सिंह सहित अन्य सभी आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
सजा के बाद मिली राहत
विशेष न्यायाधीश सह एसडीजेएम मोहित चौधरी की अदालत में सुनवाई के दौरान सभी आरोपी उपस्थित थे। सजा सुनाए जाने के बाद बचाव पक्ष ने जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने 10-10 हजार रुपये के दो मुचलकों पर एक महीने की अस्थायी जमानत मंजूर की।
अभियोजन पक्ष के गवाह
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अब तक छह गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे, जिनके आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
क्या था मामला
यह घटना 15 सितंबर 2010 की है, जब देवघर (झारखंड) में सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर तत्कालीन झाविमो विधायक प्रदीप यादव और रणधीर सिंह के नेतृत्व में सड़क जाम किया गया था। इस दौरान आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और जनजीवन प्रभावित हुआ।
मामले में तत्कालीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सह दंडाधिकारी सुधीर कुमार मोदी की शिकायत पर लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत 12 नामजद और करीब 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।