रजरप्पा मंदिर विकास पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, दुकानदारों के पुनर्वास और श्रद्धालु सुविधाओं पर मांगा डीपीआर व मास्टर प्लान

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रांची/रामगढ़ (झारखंड) : झारखंड हाई कोर्ट ने रामगढ़ जिले के मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के पुनर्विकास, विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास और श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधाओं को लेकर जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने मंदिर क्षेत्र के सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और समग्र मास्टर प्लान अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है।

यह निर्देश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिए।

254 दुकानदारों के पुनर्वास की योजना

सुनवाई के दौरान रामगढ़ के उपायुक्त ऋतुराज वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

प्रशासन ने बताया कि पहले चरण में दुकानदारों को मंदिर के समीप अस्थायी रूप से बसाया जाएगा। इसके बाद उनके लिए स्थायी दुकानों का निर्माण कर व्यवस्थित पुनर्वास किया जाएगा। उपायुक्त ने मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने सीमित समय के साथ स्वीकार किया।

भैरवी नदी के खतरनाक क्षेत्रों में दोहरी बैरिकेडिंग का निर्देश

खंडपीठ ने भैरवी नदी के खतरनाक हिस्सों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने प्रशासन को तत्काल निम्न स्तर की सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाने और मानसून के दौरान ऊंचे स्तर की अतिरिक्त बैरिकेडिंग सुनिश्चित करने का मौखिक निर्देश दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने पर जोर

प्रशासन ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए दरी बिछाई जाएगी तथा स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही वन भूमि पर अवैध कब्जा कर व्यवसाय कर रहे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ताकि विकास कार्यों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो सके।

पूर्व आदेशों के अनुपालन की समीक्षा

अदालत ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मंदिर परिसर और नदी तट के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे। इनमें शामिल हैं:

  • भैरवी नदी के दोनों किनारों पर स्थायी स्नान घाट का निर्माण

  • शौचालय, बाथरूम और चेंजिंग रूम की व्यवस्था

  • घाट से मंदिर तक अतिक्रमण मुक्त मार्ग

  • स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था में सुधार

  • कतारबद्ध श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त सुविधाएं

मेडिकल सुविधा और पेयजल पर विशेष निर्देश

उच्च न्यायालय ने मंदिर परिसर में नियमित अंतराल पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ 24 घंटे प्राथमिक चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। पर्व-त्योहारों के दौरान मोबाइल मेडिकल यूनिट की तैनाती पर भी जोर दिया गया था।

15 मई को अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 15 मई को निर्धारित की गई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि उस दिन भी उपायुक्त व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें और डीपीआर तथा मास्टर प्लान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता भारत कुमार ने पक्ष रखा, जबकि संजीव कुमार सिंह द्वारा अवमानना याचिका दायर कर पूर्व आदेशों के अनुपालन की मांग की गई है।

उच्च न्यायालय की लगातार निगरानी के बाद उम्मीद की जा रही है कि रजरप्पा मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं को शीघ्र बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी तेज होगी।