सरकारी अधिवक्ता संजीव कुमार अम्बष्ठा ने झारखंड सरकार और केंद्र से पात्र भूमि प्रभावित परिवारों के दावों की निष्पक्ष जांच कर उचित मुआवजा देने का किया आग्रह
रामगढ़ (झारखंड) :भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गरीब आदिवासी रैयतों को न्याय दिलाने की मांग उठी है। सरकारी अधिवक्ता, सिविल न्यायालय, रामगढ़ संजीव कुमार अम्बष्ठा ने इस संबंध में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड सरकार के सचिव तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव को पत्र भेजकर प्रभावित परिवारों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
पत्र में कहा गया है कि रामगढ़ जिले के ग्राम बुमरी (हकुरनंदा), थाना मांडू (ओपी कुजू) के कई गरीब आदिवासी परिवारों की जमीन वाराणसी–कोलकाता 4/6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे (भारतमाला परियोजना) के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई है।
प्रभावित परिवारों का दावा है कि उनके पूर्वजों को कई दशक पहले तत्कालीन जमींदार द्वारा हुकुमनामा/बंदोबस्ती के माध्यम से जमीन आवंटित की गई थी। तब से वे लगातार उस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। पहले उन्होंने जमींदार को लगान दिया और बाद में सरकार को नियमित रूप से मालगुजारी एवं राजस्व का भुगतान किया। इसके समर्थन में उन्होंने हुकुमनामा, लगान रसीद, सरकारी राजस्व रसीद, अमीन रिपोर्ट सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए हैं।
इसके बावजूद, राजस्व अभिलेखों में भूमि गैरमजरूआ दर्ज होने का हवाला देते हुए उन्हें अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया से संबंधित कोई नोटिस भी उन्हें प्राप्त नहीं हुआ, जबकि उनकी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है।
अपने पत्र में श्री अम्बष्ठा ने कहा है कि भारतमाला परियोजना देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में गरीब और आदिवासी परिवारों के वैध अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के पास बंदोबस्ती, कब्जा और राजस्व भुगतान से जुड़े प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उनके दावे की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुरूप उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने झारखंड सरकार से आग्रह किया है कि उपायुक्त, रामगढ़, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी, मांडू को संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया जाए, ताकि वास्तविक और पात्र रैयतों को न्याय मिल सके।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह समस्या केवल रामगढ़ जिले तक सीमित नहीं है। झारखंड के विभिन्न जिलों में हजारों भूमि प्रभावित परिवार, विशेषकर आदिवासी समुदाय के लोग, इसी तरह की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। खेती पर निर्भर इन परिवारों को समय पर उचित मुआवजा नहीं मिलने पर उनके सामने भूमिहीन होने और गंभीर आर्थिक संकट का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
अंत में श्री अम्बष्ठा ने राज्य सरकार और भारत सरकार से अपील की है कि ऐसे सभी मामलों में संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पात्र भूमि प्रभावित परिवारों के दावों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें कानून के अनुसार उचित मुआवजा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई