जमीन के दावे पर आमने-सामने दोनों पक्ष, एसडीओ कृष्ण मुरारी तिर्की ने मांगे दस्तावेज
रामगढ़ कैंट, झारखंड :रामगढ़ शहर के चर्चित झंडा चौक स्थित डीयू मिशन (सीएनआई चर्च) जमीन विवाद में गुरुवार को प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए स्थल निरीक्षण किया। रामगढ़ के एसडीओ कृष्ण मुरारी तिर्की स्वयं चर्च परिसर पहुंचे और विवादित जमीन का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दोनों पक्षों को जमीन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
जमीन के स्वामित्व और रकबे को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आने के बाद यह मामला लगातार चर्चा में है। चर्च प्रबंधन का दावा है कि डीयू मिशन के पास करीब 2 एकड़ 86 डिसमिल जमीन है, जबकि दूसरे पक्ष के हिस्से में महज 46 डिसमिल जमीन है। चर्च प्रबंधन का आरोप है कि दूसरे पक्ष द्वारा अपनी जमीन से अधिक क्षेत्र पर दावा करते हुए उस पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से चर्च प्रबंधन के दावे को खारिज करते हुए कहा जा रहा है कि उसकी जमीन केवल 46 डिसमिल नहीं, बल्कि करीब 1 एकड़ 66 डिसमिल है। इसी जमीन के दावे को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। साथ ही कई और लोगों ने भी इस मामले को लेकर प्रशासन व पुलिस को आवेदन दिया है।
जेसीबी से काम शुरू कराने की कोशिश के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि दो-तीन दिन पहले विवादित जमीन पर एक पक्ष की ओर से जेसीबी मशीन के जरिए कुछ कार्य कराने का प्रयास किया गया था। इसका दूसरे पक्ष ने विरोध किया। इसके बाद मामला और गरमा गया।
चर्च प्रबंधन से जुड़े लोगों ने जमीन की सुरक्षा और कथित अतिक्रमण के प्रयास के विरोध में रामगढ़ शहर में प्रदर्शन भी किया था। मामले को लेकर विभिन्न लोगों की ओर से जिला प्रशासन और पुलिस को आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
अब दस्तावेजों से तय होगी जमीन की स्थिति
विवाद के बीच गुरुवार को एसडीओ कृष्ण मुरारी तिर्की के स्थल पर पहुंचने से प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच आगे बढ़ी है। एसडीओ ने दोनों पक्षों को जमीन के स्वामित्व, रकबे और दावे से संबंधित दस्तावेज जमा करने को कहा है।
अब दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले कागजातों के आधार पर प्रशासन जमीन की वास्तविक स्थिति और दावों की जांच करेगा। फिलहाल प्रशासन के निर्देश के बाद विवादित जमीन को लेकर दस्तावेजी जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
डीयू मिशन की जमीन का वास्तविक रकबा कितना है और किस पक्ष का दावा दस्तावेजों के आधार पर सही साबित होता है, इस पर अब प्रशासनिक जांच के परिणाम का इंतजार है।