झारखंड को मिलेगा कुल 1360 मेगावाट बिजली
पीवीयूएनएल की पहली 800 मेगावाट यूनिट पहले से उत्पादन कर रही है। अब दूसरी यूनिट के सफल परीक्षण के बाद परियोजना से कुल 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव होगा। इसमें से 85 प्रतिशत यानी लगभग 1360 मेगावाट बिजली झारखंड को प्राप्त होगी।
गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली मांग के बीच यह उपलब्धि राज्य के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बिजली संकट कम करने में मिलेगी मदद
यूनिट-2 के शुरू होने से झारखंड के अलावा अन्य राज्यों की अतिरिक्त बिजली आवश्यकता को भी पूरा करने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से राज्य के औद्योगिक विकास और आधारभूत संरचना को नई गति मिलेगी।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने जताई खुशी
इस सफलता पर पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए. के. सहगल, सीजीएम (प्रोजेक्ट) अनुपम मुखर्जी, जीएम (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) मनीष खेतरपाल सहित पीवीयूएनएल, एनटीपीसी लिमिटेड और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की।
टीमवर्क का परिणाम : सीईओ
सीईओ ए. के. सहगल ने कहा कि यह सफलता पूरी टीम के समर्पण, तकनीकी दक्षता और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने सभी अभियंताओं, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी।
उन्होंने बताया कि पहली यूनिट का वाणिज्यिक संचालन 5 नवंबर 2025 से शुरू हो चुका है और अब दूसरी यूनिट भी जल्द कमर्शियल ऑपरेशन के लिए तैयार है।
सहयोगी संस्थाओं का जताया आभार
सीईओ ने झारखंड सरकार, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीविएनएल), एनटीपीसी और अन्य हितधारकों के सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
पीवीयूएनएल की यह उपलब्धि झारखंड की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।